swelling of legs : देशभर में सर्दियों का सीजन जनवरी माह में अपनी चरम पर चल रहा है। इस दौरान ज्यादात्तर लोगों को दिल से संबधिंत बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बता दें कि इस टाइम हार्ट अटैक यानि दिल का दौरा पड़ने के केस अधिक देखने को मिलते हैं। सामान्य तौर पर हार्ट अटैक का हिंट छाती में दर्द होता है, किंतु एक्सपर्ट्स के अनुसार पैरों की नसों में समस्या भी इसके लिए संकेत कर सकती है। पैरों की नसों में ब्लॉकेज या खराबी होने पर हार्ट अटैक या स्ट्रोक का नुकशान बढ़ जाता है। बता दें कि इसे मेडिकल भाषा में इसे पेरिफरल आर्टरी डिजीज (Peripheral Artery Disease – PAD) कहा जाता है।
पेरिफरल आर्टरी डिजीज के बारे में जानें (swelling of legs)
अहम तौर पर पेरिफरल आर्टरी डिजीज एक ऐसी स्थिति है यानि जिसमें पैरों की नसों में कोलेस्ट्रॉल जमा होने से सूजन और ब्लॉकेज हो जाता है। नसों में ब्लॉकेज होने पर पैरों तक खून सही तरीके से नहीं पहुँच पाता। यह परेशानी सिर्फ पैरों तक सीमित नहीं रहती, चूंकि शरीर की अन्य आर्टरी में भी ब्लॉकेज का डेंजर बढ़ जाता है। इसी कारण से दिल की धमनियों में ब्लॉकेज होने और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का नुकशान भी बढ़ जाता है।

पेरिफरल आर्टरी डिजीज के मुख्य लक्षण (swelling of legs)
- यदि आपको सीढ़ी चढ़ने या चलने पर पैरों में दर्द या ऐंठन महसूस हो रहा है तो, ये भी पेरिफरल आर्टरी डिजीज के संकेत हो सकते हैं?
- यदि आपके पैरों, टखनों या पंजों में सूजन है, तो वह भी कारण बन सकते हैं।
- यदि आपके पैरों में ठंडक या सुन्नपन है, तो वह भी वजह बन सकती हैं।
- यदि आपके पैरों का नीला या हल्का बैंगनी रंग हो गया है, तो ये पेरिफरल आर्टरी डिजीज के संकेत हो सकते हैं?
- यदि आपके पैरों की त्वचा का सूखापन, खुरदुरी त्वचा या नाखून का पीला और मोटा होना भी संकेत कर सकते हैं?
पैरों की नसों और हार्ट अटैक का संबंध कैसे होता है ? (swelling of legs)
विशेषज्ञों के मुताबिक, पेरिफरल आर्टरी डिजीज में पैरों में बने ब्लॉकेज या क्लॉट से हार्ट को भी जोखिम हो सकता है। ऐसे मरीजों में दिल घात का खतरा बढ़ जाता है। मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और शारीरिक गतिविधि की कमी इस बीमारी के प्रमुख जोखिम कारण हैं। हालांकि हर मरीज में यह हार्ट को समस्या नहीं पहुँचाती, मगर इसे इग्नोर करना घातक हो सकता है।

बचाव के उपाय जानें (swelling of legs)
- आप हर रोज नियमित रूप से एक्सरसाइज और पैदल चलना का अभ्यास करें।
- आप प्रतिदिन संतुलित आहार का पालन, ज्यादा फैट, मैदा और रेड मीट से बचें।
- आप तनाव को कम करना और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान अवश्य रखें।
- आप पैरों में सूजन, दर्द या सुन्नपन जैसे लक्षणों को हल्के में न लें, इसे सीरियस लें।














