Pandu Pindara : हरियाणा के जींद जिले में जींद शहर से गोहाना रोड पर पहला ही गांव है पांडु पिंडारा। बाईपास पर बने नए बस स्टैंड के बिल्कुल सामने मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित पांडु पिंडारा का इतिहास क्या है, पांडु पिंडारा की पौराणिक कथा क्या है और महाराज पांडु को किसने श्राप दिया था और क्यो दिया था, इन सब सवालों के जवाब आपको बताते हैं। ये भी बताते हैं कि पिंडारा का हिंदी में अर्थ क्या है।
जींद के पांडू पिंडारा (Pandu Pindara) में इस्थित पिंडतारक तीर्थ का महाभारत कालीन समय का प्राचीन तीर्थ है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार कौरवों और पांडवों के युद्ध समाप्ति के बाद पांडव अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां पिडंदान करने आए थे। यहां पांडवों ने 12 साल सोमवती अमावस्या का इंतजार किया। तभी से मान्यता है कि यहां अमावस्या पर दूर-दूर से श्रद्धालु पिंडदान करने आते हैं। अमावस्या पर श्रद्धालु सरोवर में स्नान करते हैं और पिंडदान करके करके तर्पण करते हैं।

अमावस्या से एक दिन पहले ही श्रद्धालु तीर्थ पर पहुंचना शुरू हो जाते हैं। रातभर धर्मशालाओं में कीर्तन चलता है और अमावस्या पर श्रद्धालु पिंडदान करते हैं। श्रद्धालु सूर्यदेव को जलार्पण करके सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। अमावस्या पर यहां मेला भी लगता है, जहां लोग घरेलू सामान व बच्चे खिलौने भी खरीदते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से यहां अमावस्या पर पुलिसकर्मी व दमकल विभाग की भी ड्यूटी लगाई जाती हैं।
History of Pandu Pindara : पिंडारा का इतिहास
पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किंवदंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है।
Pandu Pindara : सोमवती अमावस्या पर रहती है काफी भीड़
वैसे तो पांडू पिंडार तीर्थ पर हरियाली अमावस्या, चैत्र अमावस्या व वैसाखी अमावस्या पर भी श्रद्धालु यहां स्नान करने आते हैं, लेकिन सोमवती अमावस्या पर यहां ज्यादा भीड़ रहती है। सोमवती अमावस्या पर यहां स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। अमावस्या के दिन पितरों को जल अवश्य अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद हमारे जीवन पर बना रहता है। इस दिन पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
–सतबीरानंद महंत।

Way of Pandu Pindara : पिंडारा कैसे पहुंचें
पांडू पिंडारा गांव में ही नया बस स्टैंड हाईवे पर बना हुआ है। हाईवे क्रास करते ही सड़क की दूसरी ओर गांव शुरू हो जाता है। सड़क के दूसरी ओर गली है, जिसे पार करने पर सामने तालाब आता है। तालाब के साथ लगते ही तीर्थ है। यहां प्रवेश के लिए दो द्वार बनाए गए हैं। बस स्टैंड से पांडू पिेंडारा तीर्थ की दूरी लगभग 500 मीटर है। ऐसे में ज्यादातर श्रद्धालु जो बस से यहां आते हैं तो पैदल ही तीर्थ की ओर निकल जाते हैं। वहीं दूसरी ओर जो लोग अपने वाहनों से आते हैं तो वे तीर्थ के सामने आकर वाहन पार्क कर लेते हैं।
Pandu Pindara meaning in Hindi : पिंडारा का हिंदी में क्या अर्थ है ?
पिंडारा’ (Pindara) के यूं तो कई अर्थ हैं, जिनमें मुख्य रूप से पांडवों का तीर्थस्थल (पांडु पिंडारा) जहाँ पिंडदान होता है, एक प्रकार की जड़ी-बूटी/शाक (जो शीतल और पित्तनाशक है), या भैंस चराने वाला/चरवाहा शामिल हैं, और यह हरियाणा व गुजरात में एक गाँव का नाम भी है। इसका अर्थ संदर्भ के अनुसार बदलता है, लेकिन धार्मिक और वनस्पति अर्थ ज़्यादा प्रचलित हैं। इसके अलावा पिंडारा का एक अर्थ यह भी बताया जाता है कि संस्कृत से निकले अर्थों में यह एक चरवाहा या भैंस चराने वाले व्यक्ति को भी कहते हैं।













