Orthostatic Hypotension Problem : यदि किसी को कुर्सी या बिस्तर से अचानक उठते ही चक्कर आने लगते हैं या फिर आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है या गिरने जैसा हालात हो जाते है, तो इसे इग्नोर न करें। यह समस्या सामान्य जरूर है, किंतु इसके पीछे एक गंभीर मेडिकल कारण हो सकता है। इस स्थिति को Orthostatic Hypotension या Postural Hypotension कहा जाता है। आए जानें आगे विस्तार सें
ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के बारे में जानें
जब आप बैठे या लेटने की प्रक्रिया से अचानक खड़े होता है, तो गुरुत्वाकर्षण की वजह से शरीर का खून पैरों की तरफ चला जाता है। आम तौर पर ये शरीर की नसें सिकुड़कर और दिल की धड़कन बढ़ाकर दिमाग तक खून की सप्लाई बनाए रखती हैं। किंतु जब यह प्रक्रिया सुनिश्चित ढंग से काम नहीं करती, तो दिमाग तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता और चक्कर, धुंधलापन या बेहोशी जैसा महसूस होता है। जोकि मरीज के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।

विशेषक क्या कहते हैं ?
एक न्यूरोलॉजिस्ट के मुताबिक, शरीर की ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम इस संतुलन को संभालती है। यदि इसकी प्रतिक्रिया धीमी हो जाए, तो खड़े होते ही चक्कर आ सकता है। वहीं डायटीशियन के अनुसार है, शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी भी इस परेशानी को बढ़ा सकती है।
किन वजहों से बढ़ता है खतरा?
- शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के वजह से हो सकता है।
- खून की कमी (एनीमिया) की वजह से भी हो सकता है।
- लंबे समय तक बिस्तर पर रहना भी कारण बन सकता है।
- कुछ दवाइयों का असर भी खतरा बढ़ने की आशंका बनती है।
- बढ़ती आयु के साथ शरीर की प्रतिक्रिया क्षमता कम होना भी खतरा की ओर संदेश करते हैं।
- अध्ययन में यह भी सामने आया है कि खड़े होने के बाद पहले एक मिनट में अगर ब्लड प्रेशर तेजी से गिरता है, तो भविष्य में डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है।
कब डॉक्टर से मिलना आवश्यक है ?
यदि किसी व्यक्ति को बार-बार खड़े होते ही चक्कर आते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। विशेषकर बुजुर्गों में यह परेशानी गिरने, हड्डी टूटने और गंभीर चोट की वजह बन सकती है। इस स्थिति में आपको डॉक्टर से मिलना बेहद जरुरी हो जाता है।

ऐसे करें बचाव
- धीरे-धीरे खड़े हों और कुछ आसान व्यायाम करने का प्रयास करें।
- दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें।
- पैरों की हल्की एक्सरसाइज करें, ताकि आपके कोशिकाओं में खून की सप्लाई सुनिश्चित बनी रहे।
- फिसलन वाली जगहों से अपने आपको बचाव करें।
- डॉक्टर से दवाओं की समीक्षा अवश्य कराएं।
- समय रहते ध्यान देने और सही लाइफस्टाइल अपनाने से इस परेशानी को बेहद हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।













