Khujan Singh Ghogrian : हरियाणा के जींद जिले के घोघड़ियां गांव निवासी खुजान सिंह फौजी का 84 साल की उम्र में निधन हो गया। खुजान सिंह कई सालों तक भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान रहे तो इससे पहले वह आर्मी में थे, जिन्होंने साल 1965 और 1971 के युद्ध में भाग लिया और देश के लिए लड़े। सामाजिक संगठनों ने खुजान सिंह के निधन पर शोक जताया है।
खुजान सिंह के बेटे जंगजीत बूरा ने बताया कि उनके पिता खुजान सिंह (Khujan Singh) भारतीय सेना की 3rd जाट रेजीमेंट के गौरवशाली सैनिक रहे। उन्होंने 1965 के भारत पाकिस्तान (डोगरई युद्ध) युद्ध में भाग लिया। इसके बाद 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में भी सक्रिय भूमिका निभाई। राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को हमेशा याद रखा जाएगा। साल 1988 में खुजान सिंह हवलदार के पद से रिटायर हुए और इसके बाद किसान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
Khujan Singh : खुजान सिंह का सेना, किसान, जमीन, समाज से था जुड़ाव
खुजान सिंह फौजी ने किसान आंदोलनों में भाग लिया और भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान के रूप में भी 1990 से साल 2000 के बीच कार्य किया। जींद की शिव कॉलोनी में किसान भवन के निर्माण में खुजान सिंह ने अहम भूमिका निभाई। खुजान सिंह घासी राम नैन के विश्वसनीय सहयोगी और नजदीकी साथी के रूप में जाने जाते हैं। सामाजिक संगठनों, किसान संगठनों, खाप प्रतिनिधियों ने खुजान सिंह के निधन पर शोक जताते हुए कहा यह क्षेत्र के लिए अपूर्णीय क्षति है।
जंगजीत बूरा ने कहा कि आर्मी से रिटायरमेंट के पश्चात वे किसान आंदोलन और कृषि अधिकारों के संरक्षण में निरंतर समर्पित रहे। किसान हितों की रक्षा में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी रहा है।उनके पिता खुजान सिंह फौजी का व्यक्तित्व सादगी, निष्ठा, दृढ़ संकल्प और नेतृत्व के गुणों से परिपूर्ण था। समाज, सेना और किसान वर्ग को उनके निधन से जो अपूरणीय क्षति हुई है, वह लंबे समय तक महसूस की जाएगी। परमपिता परमात्मा दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।














