Jind : नई दिल्ली स्थित कृषि विश्वविद्यालय में रविवार को रधाना गांव के किसान दलबीर चहल (poison-free farming) को सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर इस कार्यक्रम में देशभर से किसानों का चयन किया गया था। दलबीर चहल अपने खेत में बिना कीटनाशक के फसल उगाते हैं। वह खुद जैविक खाद तैयार करके गेहूं, अमरुद तथा सरसों उगाते हैं। सरसों का वह तेल निकालकर बेचते हैं।
दलबीर चहल ने बताया कि वह पिछले पांच साल से अपने खेत में सुमन प्राकृतिक उद्यान व कृषि फार्म का संचालन कर रहे हैं। इस फार्म में आजतक भी किसी भी तरह के रासायनिक खादों (poison-free farming) का प्रयोग नहीं किया गया। खेती व बागवानी पूरी तरह से प्राकृतिक व जहर मुक्त है। दलबीर चहल ने बताया कि शुरआत में प्राकृतिक खेती को लेकर कई तरह की परेशानियां सामने आई लेकिन जैसे-जैसे समय बीता और प्राकृतिक तकनीक के माध्यम से फसलों की पैदावार अच्छी होने लगी।
आज उनकी फसल मंडी में जाने से पहले ही खेत से खरीद ली जाती है। उन्होंने अन्य किसानों से आह्वान किया कि जहरमुक्त खेती को त्यागकर प्राकृतिक खेती (poison-free farming) करने से बेशक उत्पादन कुछ कम हो, लेकिन स्वास्थ्य सही रहता है। दिन-प्रतिदिन बीमारियों को देखते हुए आज प्राकृतिक खेती की मांग बढ़ने लगी है। जिला कृषि विभाग द्वारा उन्हें अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग देने के लिए अधिकृत भी घोषित किया हुआ है।














