Indigo Flight Cancel twist Story : फ्लाइट कैंसिल, बेटे की परीक्षा केंद्र 800 किमी दूरी होने पर आई परेशानी , पापा ने कर दिखाया कारनामा

On: December 11, 2025 10:13 AM
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Indigo flight cancelled, but father faces trouble as son's exam centre is 800 km away, feat achieved

Indigo Flight Cancel twist Story : देश में पिछले कुछ दिनों से इंडिगो संकट के कारण से कई यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां तक उनके आवश्यक कार्य़ उड़ानों के कैंसिल होने की वजह से नहीं हो पाए। बता दें कि इस संकट के कारण कोई स्वयं के रिसेप्शन में नहीं जा पाया, तो कोई अपने घर नहीं जा पाया, तो किसी की नौकरी खतरे में पड़ गई। इन्हीं कारणों में से एक बच्चे का प्री-बोर्ड एग्जाम तक छूटने वाला था। किंतु जो काम एयरलाइन न कर पाई वो एक बेटे के पापा ने कर दिखाया। अपने बेटे को सीधा एयरपोर्ट से लेकर 800 किमी गाड़ी दौड़ाकर सीधा परिक्षा केंद्र में पहुंचाया।

जानिए कैसा पहुंचा बेटा परिक्षा केंद्र (Indigo Flight Cancel twist Story)

बता दें कि जिस दिन इंडिगो फ्लाइट कैंसल हुई, तो उसी दिन एडवोकेट राजनारायण पंघाल के बेटे का 8 दिसंबर को इंदौर में परिक्षा थी। किंतु जब वह एयरपोर्ट पहुंचे, तो पता चला कि उनके बेटे की फ्लाइट कैंसिल हो गई है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,  उसका बेटा आशीष चौधरी पंघाल (17) एक शूटिंग खिलाड़ी है। इंदौर के एक कॉलेज में 12वीं क्लास में पढ़ता है, वह छुट्टीयों के दिनों पर घर आया था और 8 दिसंबर को उसकी परिक्षा थी। उससे पहले 6 दिसंबर की शाम इंदौर के कॉलेज में उसको अवॉर्ड सेरेमनी में सम्मान मिलना था। दिल्ली से इंदौर की उसकी फ्लाइट पहले से बुक थी, उसके पिता दिल्ली एयरपोर्ट छोड़ने गया था।

Indigo flight cancelled, but father faces trouble as son's exam centre is 800 km away, feat achieved
Indigo flight cancelled, but father faces trouble as son’s exam centre is 800 km away, feat achieved

पिता ने बताई पूरी कहानी (Indigo Flight Cancel twist Story)

एक मीडिया न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में राजनारायण ने बताया कि जब वह एयरपोर्ट पहुंचे, तो उन्हें पता लगा कि इंदौर जाने वाली इंडिगो की फ्लाइट कैंसिल हो गई हैं। रद्द होने का अर्थ था कि आशीष अवॉर्ड सेरेमनी भी मिस कर जाता। उसके प्री-बोर्ड एग्जाम भी छूट सकते थे, इतने कम समय में इंदौर के लिए ट्रेन में भी सीट बुक करना बेहद कठिन था। ऐसे में पिता ने तय किया कि वे स्वयं कार चलाकर बेटे को मंजिल तक पहुंचाएंगे। राजनारायण ने दिल्ली से इंदौर तक रातभर गाड़ी चलाई। अगले दिन वह शहर में थे, बेटा समय पर पहुंच गया और अपनी परिक्षा भी दे पाया।

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इस कहानी से प्रेरणा मिलती है कि, यदि आपकी मंजिल के समय पर कुछ रुकावट आ रही है तो, उसे वक्त रहते है अपने विवेक से बेफिक्र मंजिल के रास्तों में आने वाली मुश्किलों का सामना करें और अपनी मंजिल हासिल करे। उड़ाने रद्द हुई है जनाब, किंतु आपकी मंजिल की उड़ान रद्द नही हुई है, तो वक्त रहते हुए आप अपनी उड़ान भरे।

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प्रवेश

प्रवेश पिछले पांच सालों से डिजीटल मीडिया से जुड़े हुए हैं। प्रवेश पंजाब केसरी और अमर उजाला के अलावा कई न्यूज वेबसाइट पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर चुके हैं। प्रवेश को ग्राफिक डिजाइनिंग, वीडियो एडिटिंग का भी 2 साल का अनुभव है।

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