Fatehabad Family Story : हमारे समाज में अक्सर देखने को मिलता है कि कुछ परिवार बेटे की चाहत में कई बेटियों को जन्म देना पड़ता है, इससे परिवार का विस्तार भी बढ़ता है और परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ता है। लेकिन हमारा समाज आज भी जागरुक के दौर पर पीछे है, जो हमारे सामाजिक की परिस्थितियों के आधार पर ऐसे घटनाएं देखने को मिलती है। आपको बता दें कि सरीना, अमृता, सुशीला, किरण, दिव्या, मन्नत, कृतिका, अवनिश, लक्ष्मी और वैशाली- इन नामों की यह लिस्ट किसी रजिस्टर की नहीं, जबकि उस परिवार की कहानी है, जहां बेटियों की संख्या बढ़ती चली गई, तब तक बढ़ती रही, जब तक बेटे का जन्म नहीं हो गया। भूना क्षेत्र के गांव ढाणी भोजराज में संजय और सुनीता के घर 4 जनवरी को बेटे का जन्म हुआ।
आखिर घर में दिलखुश हो गया (Fatehabad Family Story)
गांव ढ़ाणी में दस बहनों के बाद घर में बेटे की किलकारी गूंजी और उसका नाम रखा गया-दिलखुश। यह घटना परिवार के लिए खुशी लेकर आया बेटा, इसी आधार पर उसका नाम दिलखुश रखा गया। मगर संतान की कल्पना आज भी बेटे पर आकर टिक जाती है। बेटियां जन्म लेती रहीं, परिवार बढ़ता गया, आर्थिक हालत कमजोर रही, मगर छोटे परिवार या मां के स्वास्थ्य पर ठहरकर सोचने की आवश्यकता कभी केंद्र में नहीं आई।

संजय और सुनिता की विवाह (Fatehabad Family Story)
बता दें कि, संजय और सुनीता का विवाह 24 जुलाई 2007 को हुआ। शादी के डेढ़ वर्ष बाद पहली बेटी का जन्म हुआ। इसके बाद एक के बाद एक बेटियों का जन्म होता रहा। ऐसे में बेटे की चाह परिवार में बनी रही। एक मीडियाकर्मी को संजय ने बताया कि, उसने कभी बेटियों को बोझ नहीं माना। उसके मुताबिक सभी बेटियों का पालन-पोषण बेटों की तरह किया गया और पढ़ाई से लेकर दैनिक जीवन की जरूरतें पूरी करने की कोशिस की गई।
संजय-सुनीता के परिवार के बारे में (Fatehabad Family Story)
आईए संजय और सुनीता के परिवार पर एक नजर डालते हैं, जैसा कि इस जोड़े की सबसे बड़ी बेटी सरीना 17 साल की है और 12वीं में पढ़ती है। अमृता 16 साल की 11वीं में है। सुशीला 14 साल की 7वीं में, किरण 12 साल की छठी में और दिव्या 5वीं में 10 साल की है। मन्नत तीसरी में 8 साल की, कृतिका दूसरी में 6 साल की और अवनिश पहली में 5 साल की है। लक्ष्मी 3 साल की है, जबकि वैशाली अभी 1 साल की है। अब परिवार में 11वां सदस्य दिलखुश जुड़ गया है। इस तरह से संजय और सुनिता का परिवार का विस्तार हुआ है।

50 किमी दूर जाकर बची मां की जान (Fatehabad Family Story)
पाठकों को बता दें कि यह सुनीता की 11वीं डिलीवरी थी और हालात बेहद गंभीर हो गए थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद संजय पत्नी को लगभग 50 किमी दूर जींद जिले के उचाना स्थित अस्पताल लेकर गया। वहां जांच में सामने आया कि सुनीता के शरीर में केवल 5 ग्राम खून बचा था, बच्चे में पानी की भारी कमी थी और बच्चेदानी भी कमजोर हो चुकी थी। आसपास कोई डॉक्टर इस डिलीवरी में जोखिम लेने को तैयार नहीं था। ऐसे में उचाना में डॉ. नरवीर और डॉ. संतोष ने आपातकाल में बाहर से खून मंगवाकर इलाज शुरू किया। समय रहते उपचार मिलने से मां और बेटा दोनों सुरक्षित रहे।
18 वर्ष की शादी, 99 माह गर्भावस्था (Fatehabad Family Story)
संजय और सुनीता का विवाह को लगभग 18 वर्ष 5 महीने और 11 दिन हो चुके हैं। इस बड़े अंतराल में सुनीता कुल 11 बार गर्भवती रहीं। एक स्थानीय गर्भावस्था की अवधि करीब नौ महीने मानी जाती है। इस हिसाब से सुनीता ने लगभग 99 महीने, यानी 8 वर्ष तीन महीने, गर्भावस्था की स्थिति में बिताए। यह उनके वैवाहिक जीवन का करीब 43 फीसदी भाग है।

गांव में बजा डीजे, परिवार खुशी में नाचा (Fatehabad Family Story)
मीडिया को संजय ने बताया कि बेटे के जन्म से उनका दिल खुश हो गया, इसलिए उन्हें बेटे का नाम दिलखुश रखा। ऐसे गांव में जैसे ही बेटे के जन्म की सूचना पहुंची, बधाइ देने वालों का तांता लग गया। पत्नी और बेटे के घर आने पर परिजनों और रिश्तेदारों ने डीजे बजाकर जश्न भी मनाया।
क्या काम करते हैं संजय ? (Fatehabad Family Story)
संजय ने बताया कि, उनके पिता पीडब्ल्यूडी विभाग में बेलदार थे, जिनकी 2011 में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद कुछ समय तक मैने भी दिहाड़ी पर बेलदारी की, मगर बाद में काम भी छूट गया। आज के समय मैं गांव में दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहा हूं। मेरे चाचा भरत सिंह गांव में सफाई कर्मचारी हैं और उनके भी पांच बेटियां हैं।














