Epstein File 2nd Part : दुनिया में अमेरिकी मीडिया हाल ही में लीक हुए एपस्टीन दस्तावेज़ों में नामित हर अमेरिकी राजनेता की बारीकी से जांच कर रहा है, जिससे भारतीय सरकार के उच्च स्तर से जुड़ी एक बड़ी कहानी को मुख्यधारा के रुप में सामने पेश किया है और जिसमें भारत के प्रधानमंत्री के सिवा दो भारतीयों का नाम सामने आया है। आए जानें आगे विस्तार सें
भारतीय मीडिया पर उठे सवाल ? (Epstein File 2nd Part)
भारत के राजनीतिज्ञ विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय मीडिया जेफरी एपस्टीन फाइलों के जारी होने से संबंधित समीक्षित दस्तावेजों और प्रतिलेखों के आधार पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल से जुड़े उन विशिष्ट संबंधों का विवरण जिन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। ऐसे में भारतीय मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं।
“मोदी ऑन बोर्ड” ईमेल: (Epstein File 2nd Part)
पाठकों को सूचित कर दें कि, दस्तावेजों से जेफरी एपस्टीन और स्टीव बैनन (डोनाल्ड ट्रम्प के पूर्व मुख्य रणनीतिकार) के मध्य ईमेल पत्राचार का जिक्र होता है। भू-राजनीतिक रणनीति और बैठकों के संबंध में हुई बातचीत में, एपस्टीन ने बैनन को क्लियर रूप से लिखा: “मोदी ऑन बोर्ड।” यह पत्राचार दर्शाता है कि एपस्टीन ट्रम्प प्रशासन और भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय के मध्य एक उच्च-स्तरीय मध्यस्थ या “शक्ति दलाल” के रूप में कार्य कर रहे थे, मुख्य रूप से इज़राइल और चीन से संबंधित बैठकों और रणनीतियों का समन्वय कर रहे थे।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की 5 मुलाकातें (Epstein File 2nd Part)
भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की 5 मुलाकातें ईमेल में उल्लेखित रुप से भी ज्यादा चिंताजनक बात मुलाकातों का वास्तविक समय-निर्धारण है। दस्तावेजों से कथित तौर पर पता चलता है कि हरदीप सिंह पुरी (वर्तमान केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री, पूर्व राजनयिक) का नाम एपस्टीन की अपॉइंटमेंट डायरी में रिकार्ड है। रिकॉर्ड से संदेश मिलता है कि पुरी ने 2014 से 2017 के बीच यौन अपराध के दोषी एपस्टीन के साथ कम से कम पांच निर्धारित बैठकें की थीं।
भारतीय उधोगपति की इजराइल रणनीति (Epstein File 2nd Part)
भारत के जाने-माने उधोगपति अनिल अंबानी और “इजराइल रणनीति” फाइलों में अनिल अंबानी से जुड़े ईमेल भी शामिल हैं। इन ईमेलों में कथित तौर पर अंबानी द्वारा एपस्टीन से पीएम मोदी की वाशिंगटन यात्रा के कार्यक्रम के बारे में जानकारी मांगने का जिक्र है। इन तारीखों के बारे में एपस्टीन का रहस्यमय जवाब था: “भारत-इजराइल ईमेल के लिए अहम नहीं है।”
भारतीय राजनेता सुब्रमण्यम स्वामी ने क्या कहा ? (Epstein File 2nd Part)
इस मुद्दे पर भारतीय राजनेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सार्वजनिक रूप से बात रखते हुए कहा है कि ये जिक्र भारत की वैश्विक स्थिति के लिए “बहुत डेंजर ” हैं। स्वामी का तर्क है कि इन संबंधों के कारण डोनाल्ड ट्रम्प के पास मोदी पर “कमजोर नब्ज़” (प्रभाव) हो सकता है, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति को व्यापार या भू-राजनीतिक वार्ताओं में भारतीय नेतृत्व को ब्लैकमेल करने या दबाव डालने की क्षमता मिल सकती है।











