Union Bank & Bank of India : भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक बार फिर बड़े परिवर्तन की तैयारी की जा रही है। दरअसल् यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया के विलय का प्रोसेस शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक फिलहाल आंतरिक समीक्षा और ड्यू डिलिजेंस में जुटे हैं। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो यह विलय इस कैलेंडर साल के अंत तक पूरा हो सकता है, जिससे देश की बैंकिंग संरचना में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। आए जानें आगे विस्तार सें…
विलय का प्रोसेस और सरकार की रणनीति (Union Bank & Bank of India)
सूत्रों के अनुसार, यूनियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया ने अपने-अपने ऑपरेशनल प्रोसेस, जोखिम प्रबंधन और शाखा नेटवर्क के स्तर पर आकलन आरंभ कर दिया है। भारत सरकार का उद्देश्य छोटे और मध्यम आकार के पीएसयू बैंकों को बड़े बैंकों में मिलाकर मजबूत संस्थान तैयार करना है। वहीं एक वरिष्ठ बैंकिंग अधिकारी के अनुसार, सरकार चाहती है कि मौजूदा 12 सरकारी बैंकों की जगह 4 से 5 बड़े पीएसयू बैंक हों, जो ज्यादा प्रभावी ढंग से काम कर सकें और बड़े व्यय की आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।

कितना बड़ा बनेगा नया बैंक (Union Bank & Bank of India)
यदि यह विलय होता है, तो बनने वाला बैंक देश का दूसरा सबसे बड़ा पीएसयू बैंक होगा। वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के आधार पर संयुक्त बैंक की कुल संपत्ति लगभ 25.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। बता दें कि कुल मिलाकर यह बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एचडीएफसी बैंक के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा। मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से भी यह बैंक लगभग 2.13 लाख करोड़ रुपये के साथ छठे स्थान पर आ सकता है, जिससे बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक जैसे बैंकों को पछाड़ देगा।
मर्जर में सबसे बड़ी चुनौतियां (Union Bank & Bank of India)
इस संभावित विलय में सबसे बड़ी चुनौती टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म का एकीकरण मानी जा रही है। दोनों बैंकों के कोर बैंकिंग सिस्टम और डिजिटल ढांचे भिन्न-भिन्न हैं, जिन्हें एकसाथ लाना सरल नहीं होगा। इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों के तालमेल और संचालन प्रक्रियाओं का समन्वय भी एक अहम मुद्दा रहेगा। हालांकि, राहत की विशेषता यह है कि दोनों बैंकों ने हाल के सालों में एसेट क्वालिटी और मुनाफे के मोर्चे पर बेहत्तर प्रदर्शन किया है, जिससे मर्जर की नींव मजबूत मानी जा रही है।

पहले भी हो चुका है बड़ा बैंक का एकीकरण (Union Bank & Bank of India)
यह प्रस्तावित विलय 2017 से 2020 के मध्य हुए बड़े पीएसयू बैंक मर्जर के बाद अगला बड़ा फैसला माना जा रहा है। बता दें कि उस दौर में 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाए गए थे और कुल संख्या 27 से घटकर 12 रह गई थी। नीति-निर्माता लगातार इस विषय पर जोर देते रहे हैं कि कम लेकिन मजबूत बैंक भारत की बढ़ती क्रेडिट जरूरतों, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और निजी बैंकों से प्रतिस्पर्धा के लिए अनिवार्य हैं। ऐसे में यूनियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया का संभावित विलय इसी दीर्घकालिक रणनीति का भाग माना जा रहा है।














