Fake-Real RBI Note : भारत जैसे बड़े देश में नकली नोटों को सिक्योर करने के लिए RBI ने नोटों में कई खास सिक्योरिटी फीचर्स लॉन्च किए हैं, जैसे कि सिक्योरिटी थ्रेड, वॉटरमार्क, कलर-शिफ्टिंग इंक और माइक्रो लेटरिंग। इन बारीकियों के आधार पर देश का नागरिक आसानी से असली और नकली नोट में फर्क (Difference between real and fake notes) में पहचान कर सकते हैं। इस तरह आप हमेशा नोट की सुरक्षा जांचें और जालसाजी से बच सकें। आए जानें आगे विस्तार से…
आरबीआई नोटों के लिए लॉन्च किए सिक्योरिटी फीचर्स (Fake-Real RBI Note)
आज के डिजिटल टाइम (digital era) में भी नगद नोटों की लेन-देन का अपना महत्व बना हुआ है। किंतु टेक्नोलॉजी के साथ‑साथ नकली नोट बनाने वाले भी काफी चालाक हो गए हैं। यदि लोग जल्दबाज़ी में सिर्फ गांधी जी की तस्वीर देखकर नोट जेब में रख लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नोटों को सुरक्षित बनाने के लिए उनमें मात्र एक‑दो नहीं, चूंकि कई सिक्योरिटी फीचर्स छिपाए हैं, जिन्हें कोई मशीन या जाली प्रिंटर (fake printer) कॉपी नहीं कर सकता?

जानें नोटों में कहां-कहां 9 सिक्योरिटी फीचर्स है ? (Fake-Real RBI Note)
जी हां, RBI समय-समय पर नोटों के डिज़ाइन में परिवर्तन करता रहता है ताकि नकली नोटों और धोखाधड़ी को रोका जा सके। चाहे वह ₹10 का छोटा नोट हो या ₹500 का बड़ा नोट, हर नोट में अपनी खास पहचान और सिक्योरिटी फीचर्स (security features) हाइट होते हैं। आइए जानते हैं उन फीचर्स के बारे में, जिन्हें जानकर आप कभी धोखा-धड़ी का शिकार नहीं बनेंगे।
सिक्योरिटी थ्रेड के बारे में जानें (Fake-Real RBI Note)
नोट के बीचों-बीच जो चमकीली पट्टी होती है, उसे ‘सिक्योरिटी थ्रेड’ (security thread) कहा जाता है। सामान्य तौर पर ₹10, ₹20 और ₹50 के नोटों में यह पट्टी पूरी तरह अंदर दबी होती है, किंतु लाइट में देखने पर डायरेक्ट लाइन की तरह दर्शाती है। वहीं, ₹100 और उससे ऊपर के नोटों में यह पट्टी कलर‑शिफ्टिंग (color-shifting) होती है। नोट को तिरछा करने पर यह हरा से नीला दिखाई देती है। इसके साथ ही इस पर ‘भारत’ और ‘RBI’ भी लिखा भी दिख सकता है।
‘सी-थ्रू’ रजिस्टर के बारे में जानें (Fake-Real RBI Note)
पाठकों को बता दें कि नोट के बाईं ओर एक छोटा सा फूलनुमा डिज़ाइन या नंबर का पार्ट बना होता है। इसकी अहमियत यह है कि इसका आधा पार्ट नोट के आगे और आधा पार्ट ठीक पीछे हाइट होता है। जब आप नोट को लाइट के सामने रखते हैं, तो दोनों पार्ट्स मिलकर पूरा नंबर बनाते हैं। यह प्रिंटिंग (printing) इतनी बारीकी से होती है कि नकली नोट में इसे हूबहू उतारना बेहद कठिन होता है।
वॉटरमार्क के बारे में जानें (Fake-Real RBI Note)
अहम बात यह है कि नोट के सफेद भाग, जिसे वॉटरमार्क विंडो (watermark window) कहा जाता है, उसमें देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर स्पष्ट दिखाई देती है। इसमें लाइट और शेड का ऐसा असरदार होता है कि गांधी जी की फोटो के साथ‑साथ नोट की कीमत (जैसे 100 या 500) का छोटा सा ‘इलेक्ट्रो‑टाइप’ वॉटरमार्क भी दिखाई देता है। इसे लाइट के सामने रखने पर ही स्पष्ट से स्पष्ट देखा जा सकता है।

पहचान की अहम निशान (Fake-Real RBI Note)
नेत्रहीनों के लिए मुख्य रुप से नोट के बाईं ओर विशेष आकार वाले निशान बने होते हैं। एक्जेम्पेल के तौर पर: ₹100 में त्रिकोण, ₹200 में दो घेरों के साथ चार लाइनें, और ₹500 में गोल घेरा। इन निशानों को टच करके (touching the marks) कोई भी नोट की कीमत पहचान सकता है। नए नोटों में इन निशानों का साइज करीब 50 फीसदी बढ़ा दिया गया है।
उभरी हुई छपाई के बारे में जानें (Fake-Real RBI Note)
RBI ने नेत्रहीन नागरिकों के हित एवं सुविधा और नोटों की सुरक्षा (Convenience for the visually impaired and security of notes) के लिए ‘इंटैग्लियो’ प्रिंटिंग का यूज किया है। इसमें नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर, RBI की सील, अशोक स्तंभ का प्रतीक और गवर्नर के साइन थोड़े उभरे हुए दर्शाए हैं। यदि आप इन पर उंगली फेरेंगे, तो फील होगा कि छपाई कागज की सतह पर उठी हुई है।

कलर शिफ्टिंग इंक के बारे में जानें (Fake-Real RBI Note)
यदि नोटों के मध्य में जो कीमत अंकित होती है, उसे विशेष कलर‑शिफ्टिंग स्याही (color-shifting ink) से छापा जाता है। नोट को डायरेक्ट रखने पर यह हरा दिखाई देता है, किंतु तिरछा करने पर यह नीला सा नजर आता है। यह फीचर नकली नोटों में अक्सर नहीं होता, क्योंकि यह स्याही बहुत महंगी और सुरक्षित होती है।
लेटेंट इमेज के बारे में जानें (Fake-Real RBI Note)
देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर (Picture of Mahatma Gandhi) के दाईं तरफ एक वर्टिकल पट्टी लगाई जाती है। यदि आप नोट को डायरेक्ट (Horizontal) आंखों के सामने रखते हैं, तो इस पट्टी के अंदर नोट की कीमत क्लियर दिखाई देती है। वरना, सामान्य नजर में यह सिर्फ साधारण सी पट्टी लगती है।
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फ्लोरेसेंस और माइक्रो लेटरिंग के बारे में जानें (Fake-Real RBI Note)
जी हां अहम चर्चा यह है कि, यदि आप मैग्नीफाइंग ग्लास (magnifying glass) से नोट को देखेंगे, तो इसमें बहुत छोटे अक्षरों में ‘RBI’ और नोट की वैल्यू छपी होती है। इसके अतिरिक्त, नोट को अल्ट्रा-वॉयलेट (UV) लाइट के नीचे रखने पर नंबर पैनल और कुछ रेशे चमकने लगते हैं। नकली नोटों में यह चमक सटीक रूप से क्लियर नहीं दिखाई देती है।
नया नंबरिंग पैटर्न के बारे में जानें (Fake-Real RBI Note)
इतना ही नहीं, 2015 के बाद RBI ने नोटों के नंबर साइज में बदलाव किया है। अब नोट के दोनों नंबर पैनल (number panel) में अंक बाएं से दाएं बढ़ते हुए साइज में होते हैं-पहला अंक छोटा और अंतिम नंबर सबसे बड़ा दिखाई देता है। यह फीचर नकली नोटों से पहचान सरल बनाती है।

नकली नोट बनाना कानूनी अपराध (Fake-Real RBI Note)
पाठकों को बता दें कि, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 489A से 489E के जरिए नकली नोट छापना, उन्हें भारतीय बाजार में चलाना या जानते हुए भी अपने पास रखना एक गंभीर अपराध है तो इसके लिए भारी जुर्माना और जेल की सजा दोनों हो सकती है।














