National farmers day : हरियाणा के जींद जिले के गांव निडानी का किसान जयभगवान पिछले 16 साल से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। आज किसान दिवस (kisan diwas) पर हम बता रहे हैं किसान जयभगवान की कहानी, जिन्होंने प्राकृतिक खेती से लागत घटने के साथ आमदनी भी बढ़ाने का काम किया। पहले जयभगवान अपने खेत में अंधाधुंध कीटनाशकों का प्रयोग करते थे। साल 2009 में उनके इकलौते जवान बेटे पुनीत की कैंसर से मौत हो गई।
पुनीत नेटबाल का राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी था। उसे महसूस हुआ कि खेत में जो वह कीटनाशक डालता है, वह अनाज और हरे चारे के माध्यम से उनके ही शरीर में पहुंच रहा है। तभी से उसने प्रण लिया कि वह कभी अपने खेत में कीटनाशक नहीं डालेगा। उस दौरान कृषि विकास अधिकारी डा. सुरेंद्र दलाल के संपर्क में आकर जहरमुक्त खेती शुरू की।
जयभगवान आठ एकड़ की खेती करता है। जिसमें से डेढ़ एकड़ में सब्जी उगाता है और बाकी साढ़े छह एकड़ में गेहूं, धान, कपास व अन्य फसल उगाता है। घर में तीन गायें रखी हुई हैं। जिनके मल-मूत्र से खाद तैयार करके खेत में डालता है। प्राकृतिक खेती करने से उसकी लागत प्रति एकड़ करीब पांच हजार रुपये तक घट गई, वहीं फसलों के उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा। जहरमुक्त गेहूं घर से ही मार्केट से ज्यादा रेट पर बिक जाता है।

national farmers day : जयभगवान खेत में उगाता है बथुआ, पालक, धनिया, मेथी
जयभगवान मेथी, बथूआ, पालक, धनिया, हल्दी, टमाटर सहित अन्य सब्जियां अपने खेत में उगाता है। शाम को गांव में फेरी लगाकर सब्जी बेचता है। जिससे भाव भी अच्छा मिल जाता है। सालभर में तीन बार सब्जी उगाता है। जिससे डेढ़ एकड़ में सालाना ढाई लाख रुपये से ज्यादा की बचत होती है। प्राकृतिक खेती में सराहनीय कार्य के लिए जयभगवान को किसान दिवस पर मंगलवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में सम्मानित किया जाएगा।
national farmers day : सस्ते कीटनाशक मिलते थे, इसलिए डेढ़ गुणा खेत में डालता था
किसान जयभगवान ने बताया कि उसका रिश्तेदार कीटनाशक निर्माता कंपनी में काम करता था। जिसके कारण उसे कीटनाशक दवाइयां सस्ती मिलती थी। इसलिए वह जरूरत से डेढ़ गुणा कीटनाशक खेत में डालता था। साल 2009 में बेटे पुनीत को आंत में संक्रमण हो गया। चिकित्सकों ने कैंसर घोषित कर दी और कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई।
बेटे की मौत पर घर शोक जताने पहुंचे कृषि विकास अधिकारी डा. सुरेंद्र दलाल (Dr. Surender Dalal) ने उसे समझाया कि खेत में जो अंधाधुंध कीटनाशक डाल रहे हो, वह अनाज और भैसों के दूध के माध्यम से हमारे शरीर में पहुंच रहा है। उसी की वजह से बेटे को कैंसर हुई। बेटे को खोने के बाद उसने जिंदगी में कभी खेत में कीटनाशक नहीं डालने और परिवार को जहरमुक्त थाली देने का प्रण लिया।














