Vande Bharat Sleeper Train Trial : वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का ट्रायल हुआ सफल, 180 KM प्रति घंटे की रफ्तार में ट्रेन ने दिखाए अजब कारनामें

On: December 31, 2025 9:06 AM
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Vande Bharat Sleeper Train Trial: The trial of the Vande Bharat Sleeper Train was successful, the train performed amazing feats at a speed of 180 km per hour.

Vande Bharat Sleeper Train Trial : कई दिनों से चर्चाओं का स्त्रोत बन रही नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन आखिरकार वो पटरी पर दौड़ती हुई दिखाई। बता दें कि भारतीय रेलवे ने हाई-स्पीड ट्रेनों की दिशा में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने ट्रायल रन के दौरान 180 किमी प्रति घंटे की ज्यादात्तर गति पकड़कर इतिहास रच दिया। यह सफल परीक्षण सवाई माधोपुर-कोटा-नागदा सेक्शन पर किया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

रेल मंत्री ने एक्स पर शेयर किया वीडियो (Vande Bharat Sleeper Train Trial)

मंगलवार शाम यानि कल 30 दिसंबर को रेल मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए बताया कि रेल सुरक्षा आयुक्त की निगरानी में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का परीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि कोटा–नागदा खंड पर 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती यह ट्रेन भारत में विकसित नई पीढ़ी की रेल तकनीक की पावर को दर्शाती है। इस ट्रायल ने न केवल ट्रेन की रफ्तार क्षमता को साबित किया, बल्कि इसके आधुनिक डिजाइन और सुरक्षा मानकों पर भी मुहर लग गई है।

रफ्तार की दुनिया में नई क्रांति! वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने स्पीड ट्रायल में  बनाया नया रिकॉर्ड - vande bharat sleeper train sets new record in speed  trial-mobile

 

180 किमी की रफ्तार में भी नहीं छलका पानी (Vande Bharat Sleeper Train Trial)

दरअसल् शेयर किए गए वीडियो में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की तकनीकी मजबूती साफ नजर आती है। ट्रायल रन के दौरान जब ट्रेन 180 किमी प्रति घंटे की गति से पटरियों पर दौड़ रही थी, उसी समय केबिन में मौजूद एक कर्मचारी वीडियो रिकॉर्ड करता दिखाई देता है। वीडियो में ट्रेन के केबिन के अंदर स्पीडोमीटर के ठीक सामने चार गिलास पानी से भरे रखे हुए नजर आते हैं। इसमे सबसे खास बात यह है कि इतनी तेज गति के बावजूद किसी भी गिलास से पानी की एक भी बूंद नहीं छलकी। वीडियो में क्लियर देखा जा सकता है कि स्पीडोमीटर 180 किमी प्रति घंटे की स्पीड दिखा रहा है, फिर भी ट्रेन पूरी तरह स्थिर और संतुलित नजर आती है।

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स्पीडोमीटर की रेंज दिखा पानी का कमाल (Vande Bharat Sleeper Train Trial)

इस वीडियो में क्लियर देखा जा सकता है कि ट्रेन के केबिन में लगे स्पीडोमीटर की रेंज 0 से 200 किमी प्रति घंटे तक है। रिकॉर्डिंग के दौरान स्पीड का कांटा सीधे 180 किमी प्रति घंटे पर टिके हुए नजर आता है। विशेषता यह है कि इतनी तेज गति पर भी ट्रेन के अंदर रखे पानी से भरे तीनों गिलास बिल्कुल स्थिर एवं संतुलित बने रहते हैं और उनमें किसी तरह की हलचल नहीं दिखती। लगभग 24 सेकंड का यह वीडियो क्लिप रेल मंत्री के द्वारा शेयर किया गया। नीचे दिए गए लिंक्स पर पूरी विडियों देखें

https://x.com/AshwiniVaishnaw/status/2006000165803680128?s=20

सभी मानकों पर सफल हुई ट्रेन (Vande Bharat Sleeper Train Trial)

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन के अनुसार, यह ट्रायल वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के भविष्य के संचालन की दिशा में एक बड़ी तकनीकी कामयाबी है। इस परीक्षण ट्रायल ने ट्रेन की क्षमता और विश्वसनीयता को साबित किया है। यह कामयाबी भारतीय रेलवे की स्वदेशी तकनीक, आधुनिक इंजीनियरिंग और आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूती से सामने रखती है। इस ट्रेन के ट्रायल रन के दौरान ट्रेन की रफ्तार, सुरक्षा मानकों और राइड क्वालिटी की बारीकी से जांच की गई। यह पूरा परीक्षण मुख्य आयुक्त रेल संरक्षा जनक कुमार गर्ग की निगरानी में संपन्न हुआ। सफल ट्रायल के बाद अब यह वंदे भारत स्लीपर रेक यात्रियों के सफर के लिए मुहैया करवाई जा सकेंगी।

ट्रेन में क्या-क्या सुविधाएं होंगी ? (Vande Bharat Sleeper Train Trial)

पाठकों को बता दें कि इस ट्रेन में ऑटोमैटिक दरवाजे, आधुनिक टॉयलेट सिस्टम, फायर सेफ्टी उपकरण, सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान की गई हैं। रेलवे के अनुसार वंदे भारत स्लीपर यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का यात्रा अनुभव प्रदान करेगी। वहीं वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे, जिनमें स्लीपर और एसी दोनों श्रेणियों के कोच शामिल रहेंगे। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इनमें आरामदायक बर्थ की व्यवस्था की गई है। सेमी हाई-स्पीड ट्रेन होने के कारण इसमें अपग्रेडेड सस्पेंशन सिस्टम लगाया गया है, जिससे यात्रा के दौरान झटके और कंपन ज्यादा कम महसूस होंगे। विशेषतौर पर स्लीपर कोच में सफर करते समय यात्रियों को बेहतर आराम मिलेगा, चाहे ट्रेन तेज गति से ही क्यों न चल रही हो।

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प्रवेश

प्रवेश पिछले पांच सालों से डिजीटल मीडिया से जुड़े हुए हैं। प्रवेश पंजाब केसरी और अमर उजाला के अलावा कई न्यूज वेबसाइट पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर चुके हैं। प्रवेश को ग्राफिक डिजाइनिंग, वीडियो एडिटिंग का भी 2 साल का अनुभव है।

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