UPSC Success Story of Vaishnavi Paul : यूपीएससी की परिक्षा क्लियर करने के लिए लाखों युवा सपने देखते हैं, मगर यह सपना पूर्ण करने में आज की यह कहानी है वैष्णवी पाॅल (Vaishnavi Paul) की। जिन्होंने बचपन में पढ़े हुए शब्द तो याद रखे, पर उनका असली अर्थ तब समझा जब संघर्ष की असली राह को पहचाना। आइए उनकी सफलता की कहानी में जानें कैसे उन्होंने मेहनत, धैर्य और विश्वास के 5 वर्ष के बाद IAS बनने का सपना सच किया।
बचपन से ही अखबार पढ़ने की आदत
एक मीडिया न्यूज एजेंसी के साक्षरता में वैष्णवी (UPSC Success Story of Vaishnavi Paul) बताती है कि उन्होंने बचपन में ही अपने-आप से IAS बनने का वायदा किया था। इसी वायदे के सहारे अपने सपना करने की ठान ली और दिन-रात मेहनत की। उनकी मां शिक्षिका हैं और उन्हीं से मिली प्रेरणा ने वैष्णवी को हर कठिन ठगर का सामना करने का हौसला दिया। वैष्णवी हमेशा पढ़ाई को सबसे अधिक महत्व देती थीं और बचपन से अखबार पढ़ने की आदत ने उनकी सोच को और मजबूत बनाया।

वैष्णवी की पढ़ाई कैसी रही ?
पाठकों को बता दें कि, वैष्णवी (UPSC Success Story of Vaishnavi Paul) ने इंटर तक की पढ़ाई गोंडा जिले के फातिमा स्कूल से पूर्ण की थी। इसके बाद वह दिल्ली आ गईं और दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्री राम कॉलेज से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन पूरी की। मास्टर्स की डिग्री के लिए वह जवाहर नवोदय यूनिवर्सिटी (JNU) गईं। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।
बार-बार फेल होने पर हुई संघर्ष की जीत
यूपीएससी के पहले अटेंप्ट में वैष्णवी (UPSC Success Story of Vaishnavi Paul) को सफलता नहीं मिली मगर वह आगे बढ़ती रहीं। दूसरे प्रयास में भी वह असफल हो गईं, तीसरी बार यूपीएससी की परीक्षा में बैठीं मगर असफलता ही मिली। वह बताती हैं कि जब 3 बार यूपीएससी में सफलता नहीं मिली तो बुरा लगा मगर वह फिर से तैयारी में जुट गईं। 2022 में वह ऑल इंडिया रैंक-62 लाकर यूपीएससी टाॅपर बनीं।
कैलेंडर की एक पंक्ति ने बदलती वैष्णवी की जिंदगी
वैष्णवी ने ‘पल भर की सफलता जीवन भर के संघर्ष को भुला देती है’ ये वो पंक्तियां थीं जो 11 वर्ष की आयु में अपने पापा की दुकान पर रखे एक रैंडम कैलेंडर पर पढ़ी थीं। वैष्णवी को मुश्किल से ही समझ आया कि इसमें जिस संघर्ष और सफलता की बात हो रही थी, उसका क्या अर्थ है। भले ही वो इसका मतलब की गहराई का अंदाजा नहीं लगा सकी, मगर यह पंक्तियां उसके दिमाग में सदा के लिए बस गई। 5 वर्ष और चार प्रयासों में उतार-चढ़ाव की कठिन यात्रा थी। आज, जब मुझे IAS ऑफिसर के तौर पर अपॉइंटमेंट का मेल मिला तो मेरा मन 11 वर्ष में वापस चला गया। यह खुशी का पल था जिसने मुझे पांच लंबे वर्षों तक बहाए गए सारे पसीने और आंसुओं को भुला दिया।














