Jind News : जींद जिले में खरीफ फसलों में जलजमाव से हुए नुकसान के बावजूद मंडियों में पिछले साल की तुलना में अब तक बासमती धान की आवक ज्यादा हुई हैे। खरीफ फसलों में नुकसान की जो सर्वे रिपोर्ट जिला राजस्व विभाग की तरफ से भेजी गई थी, उसकी दोबारा वेरीफिकेशन करने के लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी हुए हैं। पीआर धान और बाजरे की फसल की कटाई का काम पूरा हो चुका है।
वहीं आधे से ज्यादा बासमती धान की फसल की भी कटाई हो चुकी है। किसान सरसों व गेहूं की फसल की बिजाई भी कर चुके हैं। वहीं कुछ गांव के क्षेत्र को (Jind News ) छाेड़कर ज्यादातर क्षेत्रों में खेतों से पानी की भी निकासी हो चुकी है। ऐसे में राजस्व विभाग के लिए खेतों में जाकर आंकलन करना मुश्किल है कि खेत में कितना उत्पादन हुआ है और जलजमाव से कितना नुकसान हुआ है।
इसके लिए गांवों में नंबरदारों की मदद लेनी होगी या फिर मंडियों में किसान ने कितनी फसल बेची है, इसके हिसाब से आंकलन करना होगा। गौरतलब है कि अगस्त व सितंबर में हुई वर्षा से जिले (Jind) में हजारों एकड़ (Jind News) में जलजमाव हुआ था। नरवाना, जुलाना और उचाना क्षेत्र ज्यादा प्रभावित था। खरीफ फसलों में हुए नुकसान की शिकायत दर्ज करने के लिए सरकार की तरफ से क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला गया था।

Jind News : 294 गांवों के 23 हजार 90 किसानों ने किया हुआ है आवेदन
Jind जिले के 294 गांवों के 23090 किसानों ने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर एक लाख 47 हजार 18 एकड़ में नुकसान की शिकायत दर्ज करवाई थी। उसके बाद पटवारियों ने मौके पर जाकर सर्वे करते हुए पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड की थी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दीवाली से पहले किसानों के खातों में मुआवजे की राशि डालने का ऐलान किया था। लेकिन उसके बाद प्रदेश की मंडियों में धान, बाजरे व अन्य खरीफ फसलों की ज्यादा आवक होने पर नुकसान की दोबारा वेरीफिकेशन करने के लिए जिला राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश जारी किए।
Jind News : किस ब्लाक से कितने किसानों ने दर्ज करवाई थी शिकायत
- ब्लाक -किसान –एकड़
- अलेवा -633 -4415
- जींद -3110 -18515
- जुलाना -2946 -20099
- नरवाना -8840 -55677
- पिल्लूखेड़ा -464 -3604
- सफीदों -149 -1286
- उचाना -7106 -43419
- कुल -23090 -147018
Jind News : बासमती धान की ज्यादा आवक
जिले (Jind News) की मंडियों में पिछले साल आठ नवंबर तक 22 लाख 21 हजार 994 क्विंटल बासमती धान की आवक हुई थी। जबकि मौजूदा सीजन में आठ नवंबर तक 29 लाख 63 हजार 304 क्विंटल बासमती धान की आवक हो चुकी है। हालांकि नरवाना मंडी में पिछले साल के मुकाबले कम आवक हुई है। वहीं बाकी मंडियों में पिछले साल से ज्यादा आवक है। किसानों का कहना है कि बिहार में चुनाव के चलते इस बार लेबर कम आई है। जिसके कारण बासमती धान की कटाई कंबाइन से हो रही है।

कंबाइन से कटाई के बाद सीधे किसान धान लेकर मंडी में पहुंच रहे हैं। इसी वजह से अचानक मंडियों में ज्यादा धान पहुंचा है। जबकि हाथ से कटाई में समय ज्यादा लगता है और किसान हाथ से कटे धान का घर पर स्टाक भी कर लेते हैं। कंबाइन से कटे धान का स्टाक नहीं कर सकते, क्योंकि ज्यादा दिन घर या खेत में स्टाक करके रखने से खराब होने का डर रहता है।
जिला राजस्व अधिकारी राजकुमार ने बताया कि खरीफ फसलों में नुकसान की जो सर्वे रिपोर्ट गई है। मुख्यालय से उसकी वेरीफिकेशन करने के लिए पत्र आया है। जहां फसल की कटाई हो चुकी है, वहां नुकसान के आंकलन के लिए गांव के नंबरदार की मदद ली जाएगी। किसान को कितना फसल उत्पादन हुआ, इससे भी नुकसान का आंकलन होगा। संबंधित पटवारी ये काम करेंगे।













