Jind School Bus : जिला परिवहन विभाग द्वारा वीरवार को स्कूली बसों की जांच का अभियान चलाया गया। इस दौरान तीन स्कूलों में 17 बसों की जांच की गई। पांच बसों पर सीसीटीवी कैमरा, प्राथमिक चिकित्सा उपचार पेटी, फायर सिलेंडर नहीं मिलने व इंडिकेटर टूटे जाने पर 15 हजार रुपये का चालान किया गया। वहीं इससे पिछले सप्ताह 26 फरवरी को स्कूली बसों की जांच नहीं हो पाई थी। वहीं 19 फरवरी को स्कूली बसों की जांच के दौरान तीन स्कूलों में 17 बसों की जांच की गई थी।
बसों की जांच को लेकर विशेष अभियान चलाया (Jind School Bus)
जांच के दौरान पांच बसों में सीसीटीवी कैमरा, प्राथमिक चिकित्सा उपचार पेटी व फायर सिलिंडर नहीं मिलने पर कुल साढ़े तीन हजार रुपये का चालान किया गया था। बता दें कि जिला परिवहन विभाग टीम की ओर से सप्ताह में हर वीरवार बसों की जांच को लेकर विशेष अभियान चलाया जाता है। जांच के दौरान बसों की स्थिति, सीसीटीवी कैमरे, चालकों के लाइसेंस सहित अन्य कागजातों की जांच की जाती है।

नियम तोड़ने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई (Jind School Bus )
जिला परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर बलजीत सिंह के अनुसार, फरवरी माह में एडीसी प्रदीप कुमार की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति व सुरक्षित स्कूल वाहन नीति को लेकर बैठक आयोजित की गई थी। एडीसी ने अधिकारियों को निर्देश थे कि जिले में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाए। यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
एडीसी ने क्या कहा था ? (Jind School Bus)
एडीसी ने कहा था कि स्कूलों में चलने वाले सभी वाहन तय मानकों के अनुसार होने चाहिए। किसी भी वाहन में क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाए। सभी स्कूल बसों के चालक और परिचालकों की ट्रेनिंग भी करवाई जाए ताकि वे यातायात नियमों का पालन करें और बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। स्कूल बसों की नियमित जांच पर भी विशेष जोर दिया जाए। जिले में सड़क हादसों में कमी लाई जा सके और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। ऐसे में हर सप्ताह वीरवार को स्कूली बसों की जांच का अभियान चलाया जाता है।
लगातार जारी रहेगा अभियान (Jind School Bus)
जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय की ओर से सप्ताह में हर वीरवार को स्कूली बसों की जांच की जाती है। तीन स्कूलों में 17 बसों की जांच की गई थी। इस दौरान कुछ कमियां पाए जाने पर 15 हजार रुपये का चालान किया गया। बसों की जांच का अभियान लगातार जारी रहेगा। ऐसे में सभी स्कूल संचालकों को चाहिए कि वह बसों में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए नियमानुसार हर चीज मुहैया रखे।










