Electric Car : Electric Cars सिर्फ ड्राइविंग ही नहीं, बल्कि अब कई जरूरी कामों में भी आपकी हेल्प कर सकती है, बता दें कि गांव से लेकर शहर तक, इनका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। हरियाणा में युवा किसान अपनी इलेक्ट्रिक कार को सिर्फ सड़क पर ही नहीं, बल्कि खेतों में भी उतार दिया है। जिससे वो खेती-बाड़ी में विशेष रुचि रखते है। वे नैचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देते हैं, 4×4 वाहनों और ट्रैक्टरों के भी शौक रखते हैं। अब उन्होंने EV को भी अपने खेतों में कार्य पर लगाना आरंभ कर दिया है।
EV कर रही खेतों में सहायता (Electric Car)
हाल ही में वायरल हुए एक रील में हरियाणा के एक युवा ने अपनी Electric SUV को फार्म पर यूज करते दिखे। ये कार केवल चलने का साधन नहीं, बल्कि एक मोबाइल पावर बैंक की तरह काम करती है। Vehicle-to-Load (V2L) टेक्नॉलॉजी की हेल्प से कार बैटरी से बिजली निकालकर खेती के छोटे-मोटे उपकरण, लाइट्स, पंप या अन्य टूल्स चलाए जा सकते हैं। जहां गांवों में बिजली कटौती आम बात है, वहां ये फीचर बेहद उपयोग साबित हो रहा है। यहां युवा बताते हैं कि इससे डीजल जनरेटर की जरूरत कम हो जाती है, व्यय बचता है और प्रदूषण भी घटता है।

युवाओं की ये पहल दो मायनों में विशेष है पहला, ये दिखाता है कि इलेक्ट्रिक वाहन शहरों तक सीमित नहीं रह गए, बल्कि ग्रामीण भारत की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। वहीं दूसरा, Electric Car की सहायता से आप केवल ड्राइविंग ही नहीं बल्कि पावर बैक-अप के साथ अन्य कई अनिवार्य काम कर सकते हैं।
क्या EV है स्मार्ट चॉइस ? (Electric Car)
ये प्रयास रहता है कि भविष्य की खेती केवल मेहनत की नहीं, बल्कि स्मार्ट और सस्टेनेबल भी हो सकती है। एक इलेक्ट्रिक कार जो शहर में स्टाइलिश लगती है, वही खेत में किसान का साथी बन जाती है। ऐसे इनोवेटिव कदम न केवल किसानों की लागत घटाएंगे, बल्कि कार्बन फुटप्रिंट कम करके पर्यावरण को भी मजबूत बनाएंगे।
आपके लिए कितनी बेहतर (Electric Car)
यदि आप आने वाले दिनों में एक कार खरीदना चाहते हैं और उसे खेती-किसानी में भी उपयोग करना है, तो EV ज्यादा बेहतर चॉइस हो सकती है। इसकी सहायता से आप पावर बैकअप भी ले सकेंगे और सौर पैनल या होम चार्जर से गाड़ी को पावर देकर पेट्रोल-डीजल की व्यय भी बचेगा। आइए, गांव-देहात में EV खरीदने के कुछ फायदों के बारे में जानते हैं।

ट्रांसपोर्टेशन+पावर बैकअप: एक ही व्हीकल फार्म तक सामान ले जा सकता है और वहां बिजली कटौती के दौरान जनरेटर की जगह ले सकता है। डीजल जनरेटर के मुकाबले में कोई फ्यूल व्यय नहीं, कोई शोर-प्रदूषण नहीं और मेंटेनेंस भी कम है।
ऑफ-ग्रिड उपयोगिता : ग्रामीण क्षेत्रों में जहां ग्रिड पावर अनरिलायबल है, V2L EVs को पोर्टेबल पावर स्त्रोत बनाया जा सकता है। अफोर्डेबल Electric Cars (करीब 20-25 लाख रेंज में) अब फार्मर्स के लिए कॉस्ट-इफेक्टिव सॉल्यूशन बन सकती हैं।
मल्टी-पर्पज मोबिलिटी : हरियाणा के युवाओं की तरह आप अपनी Electric Car को केवल ड्राइविंग के लिए नहीं, बल्कि एग्री-एप्लीकेशन्स में इंटीग्रेट कर सकते हैं।
सस्टेनेबल और इकोनॉमिकल : जीरो टेलपाइप एमिशन के साथ OPEX (ऑपरेटिंग कॉस्ट) बहुत कम है। एक चार्ज में फार्म के कई घंटों का काम चल सकता है। हालांकि, ये सब तभी संभव होगा जब आप V2L फीचर वाली EV खरीदेंगे।














