Haryana Education News : हरियाणा के जींद में सरकारी स्कूल के प्रिंसीपल को चार्जशीट किया गया है। स्कूल की ही एक महिला टीचर ने प्रिंसीपल पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके बाद प्रिंसीपल पर अंडर रूल-7 के तहत कार्रवाई हुई है। हालांकि प्रिंसीपल दिव्यांग है और उसने कहा है कि उस पर लगे सारे आरोप निराधार हैं।
बता दें कि जींद के सरकारी स्कूल की अध्यापिका ने प्रिंसीपल पर आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी। इसमें अध्यापिका ने कहा था कि प्रिंसीपल राजकुमार भोला उन्हें परेशान कर रहे हैं। मीटिंग के बहाने उसे पास बैठाकर रखते हैं और स्कूल टाइम के बाद भी देर तक बैठा कर रखते हैं। अध्यापिका ने यह भी आरोप लगाया कि प्रिंसीपल ने उन्हें होटल में चलकर खाना खाने के लिए दबाव बनाया। प्रिंसीपल ने उसे बैड टच भी किया। बीमार होने पर उसने डॉक्टर के पास जांच के लिए जाना था लेकिन प्रिंसीपल ने उसे छुट्टी नहीं दी। इसकी शिकायत उसने प्रशासन को की लेकिन कहीं कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए आखिर में उसने सीएम विंडो (CM Window) पर इसकी शिकायत दी।
सीएम विंडो पर मामला जाने के बाद जांच के लिए जिला स्तरीय सेक्सुअल हैरेसमेंट कमेटी का गठन हुआ और इसे पूरे मामले की जांच की। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित की गई जांच कमेटी में उचाना की खंड शिक्षा अधिकारी पुष्पा मोर, सिंधवी खेड़ा के सरकारी स्कूल की प्राचार्या सुनीता मलिक, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की लीगल सहायक प्रीति यादव और एक एनजीओ समर्पण विकास मंच की प्रेम चौधरी को शामिल किया गया।
Education News : कमेटी ने जांच पूरी कर सौंपी, मुख्यालय से हुई कार्रवाई
कमेटी ने अपनी जांच को पूरा करने के बाद इसे जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और मुख्यालय को सौंप दिया। इसके आधार पर अब शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने जींद के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य राजकुमार को हरियाणा सिविल सर्विसेज रूल-7 के तहत चार्जशीट (Jind school principal chargesheet) कर दिया। प्राचार्य को 15 दिन में चार्जशीट पर अपना जवाब देने के लिए कहा गया है।
इस मामले में प्रिंसीपल का कहना है कि वह खुद दिव्यांग हैं। वे देख नहीं सकते हैं। उसने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा कि चार्जशीट का जवाब देंगे। प्रिंसीपल ने ये भी कहा कि डीसी द्वारा गठित जांच कमेटी ने स्कूल की अध्यापिका द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों की जांच की थी, जिसमें सभी आरोप निराधार बताए गए थे। प्रिंसीपल ने कहा कि वह 100 प्रतिशत दिव्यांग हैं। दो कदम चलने के लिए उन्हें सहारे की जरूरत पड़ती है। ऐसे में वह किसी को स्कूटर पर होटल में लंच के लिए चलने की कैसे कह सकते हैं। उनके पास स्कूटर भी नहीं है और वे स्कूटर चला भी नहीं सकते।













