Success Story : पत्नी ने खुद नौकरी कर पति को पढ़ाया, मिली सफलता, JSSC की परिक्षा की पास कर लहराया परचम

On: December 11, 2025 1:26 PM
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Best JSSC Success Story: In today's era, the wife gave the message of women power, the wife taught by working, the husband passed the JSSC exam.

Best JSSC Success Story :  आज हम झारखंड राज्य के गढ़वा जिले के छप्परदग्गा गांव के अनिल कुमार चौधरी और उसकी पत्नी संघर्ष भरी कहानी सुनाने जा रहे है, जो कि आज के दौर में पति-पत्नी के रिश्तों पर अनेक मामले सामने आते है। जिससे समाज के संदर्भ भरे रिश्तों को नुकशान पहुंचता है। बता दें कि अनिल चौधरी के 8 वर्ष के अथक संघर्ष के बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (ASO) का पद हासिल किया है। 8 दिसंबर 2025 को अंतिम मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद उनके घर में खुशीयों का माहौल छाया। अनिल की इस सफलता में उनके माता-पिता के साथ पत्नी का जबरदस्त अहम किरदार रहा। आईए जानें आगे

पत्नी ने कहा, परिवार की जिम्मेदारी हम संभाल लेंगे Best JSSC Success Story

पाठकों को बता दें कि, अनिल की इस कामयाबी की सबसे बड़ा सहयोग निभाने में उनकी प्यारी पत्नी हैं। साल 2022 में शादी के बाद उनकी पत्नी (पंचायत सचिव) ने उन्हें पूरी तरह से करियर पर ध्यान केंद्रित करने के लिए और कहा ‘आप अपना करियर पर ध्यान दीजिए, परिवार की जिम्मेदारी हम संभाल लेंगे’। पत्नी का ये अटूट विश्वास दर्शाता है कि अनिल के लिए ये सबसे बड़ी ताकत बना। इस समर्थन की वजह से अनिल बिना किसी आर्थिक या पारिवारिक परेशानी से अपनी पढ़ाई जारी रखी। अनिल के पिता ब्रह्मदेव चौधरी अपने आप में एक किसान हैं। उनके मार्कदर्श ने भी अपने बेटे को शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी, भले ही उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी। फिर भी सदा उन्होंने अनिल को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। इसी वजह से अब अनिल कामयाब हो गया।

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JPSC में मात्र कुछ अंकों से चुकने से लगी निराशा Best JSSC Success Story

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बता दें कि अनिल ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव में पूर्ण की और 2017 से गंभीरता से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आरंभ की। उन्होंने इस दौरान पटना पहुंचकर दो वर्ष तैयारी की और इस दौरान कई बार असफलता का सामना किया। यहां तक कि वह दो बार JPSC परीक्षा में भी कुछ अंकों से चूक गए, किंतु उन्होंने हार नहीं मानी। ये हौंसला दिखाता है कि वो अपनी मेहनत में पूरी लगन से जुटा हुआ था।

लंबे 8 वर्ष के संघर्ष अंतराल में निरंतर प्रयास का रिजल्ट यह रहा कि वह अंततः ASO बनने में कामयाब हुए। पिता ब्रह्मदेव चौधरी ने अपने बेटे पर गौरवपूर्ण गर्व करते हुए कहा है कि उनके परिवार में यह पहली सरकारी नौकरी है। अब गांव के लोगों ने अनिल की मेहनत की सराहना करते हुए कहा है कि यह यात्रा लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है। परिवार का अटूट विश्वास भरा स्पोर्ट और निरंतर मेहनत हर बड़ी कठोर मंज़िल को पाना आसान हो जाता है।

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प्रवेश

प्रवेश पिछले पांच सालों से डिजीटल मीडिया से जुड़े हुए हैं। प्रवेश पंजाब केसरी और अमर उजाला के अलावा कई न्यूज वेबसाइट पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर चुके हैं। प्रवेश को ग्राफिक डिजाइनिंग, वीडियो एडिटिंग का भी 2 साल का अनुभव है।

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