Solar Expressway : भारत सरकार एक बार फिर देश में एक नया ऐतिहासिक कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश में देश का पहला Solar Expressway (सोलर एक्सप्रेसवे) डेवलप किया जा रहा है, जहां तेज़ गति वाहनों के साथ-साथ बिजली का भी उत्पादन होगा। यह अनोखी परियोजना बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर आरंभ की जा रही है, जिससे सड़क, ऊर्जा और विकास तीनों को एक साथ बढ़ावा मिलेगा।
क्या है सोलर एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट (Solar Expressway)
इस परियोजना को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) द्वारा डेवलप किया जा रहा है। योजना के जरिए बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को सोलर एक्सप्रेसवे के रूप में चेंज किया जाएगा। इसका डायरेक्ट लाभ सामान्य नागरिकों को मिलेगा, क्योंकि इससे न केवल बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा मिलेगी। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 296 किमी है। इस पूरे मार्ग के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। भारत सरकार ने इस परियोजना के लिए पहले से ही उपयुक्त जमीन को चिन्हित कर लिया है, ताकि अलग से भूमि अधिग्रहण की अनिवार्यता न पड़े।
एक्सप्रेसवे का किस तरह होगा निर्माण (Solar Expressway)
पाठकों को सूचित कर दें कि, एक्सप्रेसवे के दोनों ओर 15 से 20 मीटर चौड़ी खाली पट्टी का इस्तेमाल कर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इस तरह सड़क के साथ मौजूद जमीन का सही इस्तेमाल होगा और बिना किसी अतिरिक्त भार के बड़ा ऊर्जा प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। फिलहाल उत्तर प्रदेश में लगभग 15 एक्सप्रेसवे हैं। इनमें से कुछ पर यातायात पूरी तरह शुरू हो चुका है, कुछ निर्माणाधीन हैं और कुछ प्रस्तावित चरण में हैं। इन सभी में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को सबसे विशेष माना जा रहा है, क्योंकि यही देश का पहला एक्सप्रेसवे होगा जो Renewable Energy का बड़ा स्रोत बनेगा।

550 मेगावाट सौर ऊर्जा का टारगेट (Solar Expressway)
इस सोलर एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के पूरा होने के पश्चात करीब 550 मेगावाट सौर उर्जा का उत्पादन होने की संभावना है। इससे लाखों घरों को बिजली की सप्लाई दी जा सकेगी। विशेष बात यह है कि इस बिजली का इस्तेमाल सिर्फ घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए EV चार्जिंग स्टेशन लगाने की भी योजना है। यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए बेहद खास मानी जा रही है।
हरित ऊर्जा से यूपी होगा अग्रणी प्रदेशों में शामिल (Solar Expressway)
हरित ऊर्जा के क्षेत्र में यह उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने में कारगर साबित होगा। पहले ही 8 सोलर पावर डेवलपर्स ने सरकार के सामने अपने प्रस्ताव रखे हैं। इससे क्लियर है कि निजी क्षेत्र की भी इस प्रोजेक्ट में गहरी इच्छा है। सोलर पैनल लगाने का काम PPP Model (Public Private Partnership) के जरिए किया जाएगा। एक्सप्रेसवे के मुख्य मार्ग और सर्विस लेन के मध्य की खाली जमीन पर सोलर प्लांट लगाए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि बुंदेलखंड क्षेत्र इस परियोजना के लिए सबसे उपयुक्त है, क्योंकि यहां ज्यादातर मौसम क्लिन रहता है और औसतन 800 से 900 मिमी बरसात होती है।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का रूट में जुड़े और जिले (Solar Expressway)
पाठकों सूचित कर दें कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा जिलों से होकर गुजरता है। इसकी शुरुआत चित्रकूट के भरतकूप के पास गोंडा गांव से होती है और यह इटावा के कुदरैल गांव तक जाता है, जहां यह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। इस पूरे रूट पर रहने वाले लोगों को बेहतर सड़क, बिजली और रोजगार के अवसर मिलेंगे। यदि यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में गोरखपुर एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भी ऊर्जा उत्पादन की आशंकाओं का विस्तार किया जा सकता है।
कितने टाइम में होगा तैयार (Solar Expressway)
इससे वर्षभर ऊर्जा खर्च में करोड़ों रुपये की बचत संभव है और भारत सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। पाठकों को बता दें कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के निर्माण पर लगभग 14,850 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। यह एक्सप्रेसवे रिकॉर्ड 28 महिनों में बनकर तैयार हुआ था। फिलहाल यह 4 लेन का है, जिसे भविष्य में 6 लेन तक बढ़ाया जा सकता है। यहां इमरजेंसी मेडिकल सर्विस, 24 घंटे एंबुलेंस, पुलिस पेट्रोलिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाई हैं।












