Success Story : यदि आपके ख्वाबों में कुछ बड़ा करने का है तो मेहनत के साथ-साथ सही दिशा में संघर्ष करना आवश्यक है। बता दें कि हरियाणा की लाडली ने भी कुछ ऐसा किया था, SDM बनने की जिद की वजह से उन्होंने PhD छोड़ दी थी। 8 से 10 घंटे की पढ़ाई करके उन्होंने UPPCS परीक्षा में टाॅप रैंक प्राप्त किया, जिसके निमित आज लाखों युवा सपना देखते हैं। इस सफलता की कहानी में आए जानते हैं उनका सफर।
संगीता के परिवार के बारे में जानें (Success Story)
आपको बता दें कि, संगीता मूलरूप से प्रदेश के गुरुग्राम के शांति नगर की निवासी हैं। वह एक अच्छे बैकग्राउंड वाले परिवार से आती हैं। उन्होंने अपनी आरंभिक पढ़ाई यही से पूरी की थी। उनके परिवार में पिता इंडियन नेवी से रिटार्ड ऑफिसर हैं और उनकी माता गृहिणी है।

इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से किया मास्टर्स (Success Story)
हरियाणा की लाडली संगीता ने बैचलर्स की पढ़ाई गुरुग्राम में ही पूरी की थी। हालांकि, मास्टर डिग्री के लिए उन्होंने दिल्ली की इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी पढ़ाई की थीं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में PhD प्रोग्राम में दाखिला लिया था।
SDM बनने के लिए PhD छोड़ी (Success Story)
दरअसल् संगीता सिविल सर्विस में जाना चाहती थीं, जोकि SDM बनने की जिद और जुनून के कारण से उन्होंने 1 साल बाद ही पीएचडी छोड़ दी थी और साल 2018 से UPPCS एग्जाम की तैयारी भी कर रही थीं। उन्होंने साउथ एशियन इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर वर्ल्ड बैंक के एक प्रोजेक्ट पर कार्य किया था। उन्हें पढ़ाई के लिए स्काॅलरशिप भी मिलीं और इस कारण से उनको हायर स्टडीज में ज्यादा सहायता मिली।

8 से 10 घंटे की पढ़ाई, पहली बार मिली कामयाबी (Success Story)
संगीता ने अपनी यूपीपीएससी की तैयारी में शुरुआत 5 से 6 घंटे पढ़ाई से की थी। हालांकि, बाद में वह 8 से 10 घंटे पढ़ाई करने लगीं। 2017 में उन्होंने यूपीपीएससी की परीक्षा दी थी चूंकि उन्हें इसमें ना-कामयाबी मिली। इसके पश्चात उन्होंने अपनी तैयारी और तेज कर दी और आगे बढ़ती रहीं।
2018 में टाॅप रैंक-2 हासिल कर बनी SDM (Success Story)
2018 में उनकी मेहनत रंग लाई थी। इस बार उन्होंने 2018 में दोबारा परिक्षा दी और शानदार रैंक-2 प्राप्त की थी। अब वह SDM के तौर पर काम कर रही हैं, और उन्होंने अपनी लगातार प्रयासों से बड़ी सफलता हासिल की है।














