Widow Property Rights : हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने विधवा महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। बता दें कि देश की सर्वोच्च अदालत ने प्राचीन भारतीय ग्रंथों और आधुनिक कानून का मेल करते हुए क्लियर किया है कि एक विधवा बहू का अपने ससुर की संपत्ति पर भरण-पोषण (Maintenance) का कानूनी अधिकार है। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने फैसले के दौरान ‘मनुस्मृति’ के नैतिक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए समाज को सशक्त संदेश दिया है।
अपनों को छोड़ना दंडनीय अपराध (Widow Property Rights)
कोर्ट ने कदम उठाने के दौरान प्राचीन ग्रंथ मनुस्मृति के एक श्लोक का जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि शास्त्रों में क्लियर है कि माता, पिता, पत्नी और पुत्र को कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। जो व्यक्ति समर्थ होने के बावजूद अपनों को बेसहारा छोड़ता है वह दंड का पात्र है। सर्वोच्च अदालत ने इसी सिद्धांत को हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम 1956 के साथ जोड़कर देखा। पीठ के अनुसार ससुर की यह नैतिक और धार्मिक दायित्व है कि वह अपने पुत्र की मृत्यु के बाद विधवा बहू का ध्यान रखे।

भेदभाव का तर्क पूरी तरह असंवैधानिक माना जाएगा (Widow Property Rights)
इस केस में एक अजीबोगरीब कानूनी पेच फंसाया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यदि बहू ससुर के जिंदा रहते विधवा होती है, तभी उसे गुजारा भत्ता मिलना चाहिए। यदि ससुर की मृत्यु के बाद पति की मौत होती है, तो बहू हकदार नहीं है। इस पर यानि सर्वोच्च अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा है कि
- मनमाना भेदभाव असंवैधानिक : पति की मृत्यु के समय के आधार पर विधवा बहुओं को दो श्रेणियों में बांटना पूरी तरह से तर्कहीन और असंवैधानिक है।
- समान अधिकार : चाहे पति की मौत ससुर के जीवनकाल में हुई हो या बाद में दोनों ही स्थितियों में विधवा बहू को ससुर की विरासत वाली संपत्ति से सम्मानजनक भरण-पोषण पाने का पूरा संवैधानिक अधिकार है।

धारा 22: वारिसों की कानूनी मजबूरी (Widow Property Rights)
सर्वोच्च अदालत ने अधिनियम की धारा 22 की व्याख्या करते हुए क्लियर किया है कि मृतक व्यक्ति की संपत्ति जो भी वारिस हासिल करता है उस पर यह कानूनी दायित्व (Liability) है कि वह मृतक पर निर्भर व्यक्तियों (जैसे विधवा बहू) का भरण-पोषण करे। यदि विधवा बहू के पास अपनी आय का कोई स्त्रोत नहीं है या उसके मृत पति ने उसके लिए कोई संपत्ति नहीं छोड़ी है तो उसे ससुर की संपत्ति से भाग मिलना जरुरी है।
महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि को समझें (Widow Property Rights)
सुप्रीम कोर्ट ने भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कानून की संकीर्ण व्याख्या करके विधवा बहुओं को अधिकारों से वंचित किया गया तो वे गरीबी और सामाजिक हाशिए पर धकेल दी जाएंगी। यह महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा के लिए गंभीर खतरा होगा। इस निर्णायक फैसले से अब देशभर की उन विधवा महिलाओं को ताकत मिलेगी जो ससुराल में संपत्ति विवाद या उपेक्षा का सामना कर रही हैं।












