Happy New Year Story : हर वर्ष आप सभी नव वर्ष मनाते हो और एक-दूसरे को बधाई एवं मुबारकवाद देते हो। मगर क्या आप जानते हैं कि हमेशा से 1 जनवरी को नव-वर्ष का पहला दिन नहीं माना जाता था? एक समय ऐसा भी था जब साल मार्च से आरंभ होता था और उसमें मात्र 10 माह ही होते थे। आज हम जो नव-वर्ष मनाते हैं उसके पीछे हजारों वर्षों का एक इतिहास, राजाओं के फैसले और कैलेंडर में हुए बड़े- बड़े परिवर्तनों से छिपा हैं। आइए जानें पूरे विस्तार से इसके पीछे की पूरी कहानी…
मार्च से होती थी नए साल की शुरुआत (Happy New Year Story)
पौराणिक काल तथा प्राचीन रोम के शुरुआती काल में कैलेंडर आज से पूर्ण रुप से अलग था। पुराने कैलेंडर में नव वर्ष की शुरुआत 1 मार्च से होती थी और दिसंबर पर वर्ष समाप्त हो जाता था। मार्च को वर्ष का पहला माह इसलिए चुना गया था क्योंकि यह वसंत ऋतु और खेती की शुरुआत का समय होता था। साथ ही, रोमन सेनाएं भी इसी माह से अपने सैन्य अभियान की शुरूआत करती थीं।

जनवरी और फरवरी का आगमन कैसे हुआ ? (Happy New Year Story)
आज से करीब 700 ईसा पूर्व (700 BCE), रोमन राजा नूमा पोम्पिलियस ने कैलेंडर में सुधार किया और दो नए माह जोड़े जनवरी और फरवरी। रोमन सीनेट ने राजनीतिक कारणों से 1 जनवरी को नए सरकारी साल की शुरुआत घोषित किया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि नए चुने गए अधिकारी समय पर अपना पदभार संभाल सकें और आने वाले युद्धों की बेहतर योजना और शानदार तैयारी कर सकें।
जूलियस सीजर और जूलियन कैलेंडर के बारे में जानें (Happy New Year Story)
पाठकों को बता दें कि, 45 ईसा पूर्व (45 BCE) में जूलियस सीजर ने एक ऐतिहासिक परिवर्तन किया। उन्होंने अपने काल में ‘जूलियन कैलेंडर’ लॉन्च किया, जिसने कैलेंडर को सूरज की गति (Solar Year) के साथ जोड़ा। सीजर ने औपचारिक रूप से 1 जनवरी को वर्ष का पहला दिन बनाया। ‘जनवरी’ नाम रोमन देवता ‘जानूस’ (Janus) के नाम पर रखा गया है जिनके दो चेहरे थे—एक पीछे (बीते साल) की ओर और एक आगे (आने वाले साल) की तरफ देखता हुआ। इसी समय लीप वर्ष (Leap Year) की शुरुआत हुई जिससे समय की गणना और भी सुनिश्चित हो गई।

मध्यकाल की धार्मिक बहस और पोप ग्रेगरी का सुधार कैसे हुआ ? (Happy New Year Story)
पौराणिक काल में तथा रोमन साम्राज्य के पतन के बाद ईसाई धर्मगुरुओं ने 1 जनवरी को मनाना बंद कर दिया क्योंकि वे इसे पुरानी गैर-ईसाई परंपरा मानते थे। उस दौरान यूरोप के कई जगहों में 25 दिसंबर (क्रिसमस) या 25 मार्च को नया साल मनाया जाने लगा, मगर जूलियन कैलेंडर में कुछ गणितीय गलतियां थीं जिन्हें ठीक करने के लिए 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने ग्रेगोरियन कैलेंडर लॉन्च किया गया। इस सुधार ने 1 जनवरी को फिर से आधिकारिक तौर पर ‘नया साल’ पूर्ण रुप से घोषित किया गया। कैथोलिक देशों ने तो इसे तुरंत मान लिया लेकिन दुनिया में अन्य देश जैसा कि ब्रिटेन ने 1752, रूस ने 1918 और ग्रीस ने 1923 में इसे अपनाया। आज यही ग्रेगोरियन कैलेंडर पूरी दुनिया में मानक के रूप में जाना जाता है और इसे उपयोग किया जाता है।













