Success Story : उसकी उम्र महत 2 साल की थी, जब पिता का आकस्मिक निधन हो गया और उसके सिर से पिता और मां के सिर से पति का साया उठ गया। मां ने दिन-रात कड़ी मेहनत की और पाई-पाई जोड़कर बेटे को पढ़ाया। आज बेटा सेना में लेफ्टिनेंट बन गया है। ये सक्सेस स्टोरी है जींद जिले के अलीपुरा गांव निवासी हरदीप गिल की। ये सक्सेस स्टोरी है हरदीप की माता संतरो देवी की, जिनका संघर्ष आज रंग लाया है।
जींद जिले के अलीपुरा गांव निवासी हरदीप गिल (Hardeep Gill Success Story) ने हाल ही में देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में 157वीं पासिंग आउट परेड में भाग लिया। हरदीप गिल अब सेना में बड़े अधिकारी बन चुके हैं। हरदीप गिल की सफलता के पीछे उनकी मां संतरो देवी के संघर्ष की कहानी बहुत लंबी है। करीब 20 साल पहले संतरो के पति का निधन हो गया था।
Success Story : मां ने की दिन रात मेहतन, बेटे को मुकाम पर पहुंचाया
जब हरदीप गिल महज 2 साल के थे। संतरो देवी ने तीन बेटियों और महज दो साल के बेटे हरदीप गिल को अकेले ही संघर्ष करते हुए पाला। संतरो देवी ने परिस्थितियों से हार नहीं मानी और अपने बच्चों को सफल बनाने के लिए रात दिन मेहनत की। संतरो देवी सरकारी स्कूल में मिड-डे मील वर्कर हैं। यहां सिर्फ नाम मात्र ही मानदेय मिलता है। इस काम के साथ संतरो देवी (Santro Devi Success Story) ने मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
परिस्थितियों से जुझते हुए बच्चों ने भी मां के संघर्ष से प्रेरणा लेते सफलता के झंडे गाड़े हैं। हरदीप गिल ने अपने गांव के स्कूल से पढ़ाई करने के बाद IGNOU से स्नातक की परीक्षा पास की। परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए हरदीप ने भी मां का साथ दिया और पढ़ाई के साथ खेतों में काम किया। इन संघर्षों के बदौलत आज वे सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं।
वहीं हरदीप गिल (lieutenant Hardeep Gill) की मां ने कड़े संघर्ष कर बेटे को इस मंजिल तक पहुंचाया है। हरदीप के पिता की मौत करीब 20 साल पहले हो गई थी, जब वे मात्र 2 साल के थे। आज हरदीप गिल की सफलता पर आसपास के लोग व रिश्तेदार भी घर पर पहुंच कर शुभकामनाएं दे रहे हैं।













