Jind : पुराने समय के बुजुर्गों में दूध-घी का असर 80 साल की उम्र तक भी देखा जा सकता है। 75 से 80 साल के बुजुर्ग भी कई बार वो कमाल कर देते हैं, जो आज के युवाओं से मुश्किल से हो पाता है। जींद जिले के नरवाना क्षेत्र में भी ऐसा ही 80 साल का बुजुर्ग है, जो दो ऊंगलियों से ही भारी ईंट को उठा लेता है। यह हर किसी के बस की बात नहीं है।
जी हां, बुजुर्ग 80 वर्षीय रतन सिंह चोपड़ा (Jind Ratan Chopra), जिनके हाथों की ताकत अब भी बरकरार है। रतन सिंह ईंट के छोटे से सुराख में अपने एक हाथ की उंगली फंसाकर उसे अपनी छाती तक उठा लेते हैं। नरवाना शहर निवासी रतन सिंह ने बताया कि इसमें दोनों बातें काम करती हैं। उंगलियों से ईंट उठाने में ताकत तो काम आती ही है, मगर इसमें उंगलियों की करामात भी कम नहीं आंकी जा सकती।
Jind : जवानी में तीन-तीन ईंट एक साथ उठा लेते थे रतन चोपड़ा
रतन चोपड़ा बताते हैं कि यह तो एक ईंट की बात है, जब वे जवान थे, ईंट के दोनों ओर एक-एक ईंट और रखकर इसी प्रकार उंगलियों से तीन ईंट उठा लिया करते थे। उम्र के इस मोड़ पर आए बुजुर्ग रतन सिंह बताते हैं कि उन दिनों में वे गांव में लगने वाले मेलों के कुश्ती दंगल में कुश्ती भी लड़ा करते थे। कुश्ती में जीतने पर लोगों द्वारा वहां खूब पैसे इनाम में मिलते थे।
जब उन्हें यह पता लग जाता था कि इनाम में पैसे देने वाला उनके गांव का बटेऊ या भानजा है, तो वे उसको वापस कर देते थे। क्योंकि बुजुर्गों की प्रचलित परंपरा के अनुसार लड़की से संबंधित नाते-रिश्तेदारों को रुपये देना तो मंजूर था, पर लेना नहीं। उनका कहना है कि उन दिनों 10 हजार दंड बैठक ( उठ-बैठ) करना उनके लिए कोई मुश्किल काम नहीं था।
इन सब के बावजूद वे खेती भी (Jind News) दब कर करते थे, तो फुर्सत के क्षणों में तालाब पर घडवा-बैंजू पर गाना बजाना भी कर लिया जाता था, जो उनका यह शौक आज भी जिंदा है। वर्तमान में वे अपनी आवाज को बुलंद करने के लिए किसान संगठनों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।














