Kaithal Sarpanch Suspended : हरियाणा के कैथल में डीसी प्रीति ने संगतपुरा गांव की महिला सरपंच को सस्पेंड कर दिया। सरपंच के परिवार ने पंचायती जमीन पर अवैध कब्जा किया हुआ था और इसकी जानकारी भी शपथ पत्र में नहीं दी गई थी। शिकायत के आधार पर जांच हुई तो इसमें अनियमितताएं पाई गई, जिस पर डीसी ने संज्ञान लेते हुए सरपंच को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
बताया जा रहा है कि पंचायती चुनाव के दौरान सोनिया नामक महिला ने सरपंची के लिए आवेदन किया हुआ था। इस दौरान सोनिया ने जो शपथ पत्र प्रस्तुत किया, उसमें अवैध कब्जे से संबंधित किसी तरह की जानकारी नहीं दी गई थी। सोनिया चुनाव जीतकर सरपंच बन गई। कुछ समय बाद गांव के ही बलजीत सिंह ने डीसी को शिकायत देते हुए कहा कि सरपंच सोनिया के ससुर प्रेम सिंह का पंचायती जमीन पर अवैध कब्जा है। चुनाव के समय भी यह जानकारी परिवार ने छिपा ली थी। मामले की जांच संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को सौंपी गई।
Kaithal Sarpanch Suspended : एसडीएम की जांच में पाया सरपंच के ससुर का अवैध कब्जा
SDM की जांच में सरपंच के ससुर का जमीन पर अवैध कब्जा पाया गया। एसडीएम ने इसे गंभीर चूक करार देते हुए कहा कि महिला सरपंच ने अपने पद का दुरुपयोग किया है और कर्तव्य का सही से निर्वहन नहीं किया। एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर डीसी ने संज्ञान लेते हुए सरपंच सोनिया को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। हालांकि सस्पेंड करने से पहले महिला सरपंच को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने के लिए 7 दिन का समय दिया गया। महिला सरपंच द्वारा 2 सितंबर को इसका लिखित जवाब एसडीएम कार्यालय में दिया गया।
Kaithal : बहुमत वाले पंच को दिया जाएगा सरपंची का चार्ज
इसके बाद फिर 9 अक्टूबर, 16 अक्टूबर, 29 अक्टूबर व 10 नवंबर को सरपंच को डीसी के सामने अपने बयान देने के लिए बुलाया गया। इस दौरान महिला सरपंच द्वारा अपने पक्ष में दिए गए तर्क संतोषजनक नहीं पाए गए। डीसी प्रीति ने सस्पेंशन लैटर जारी करते हुए आदेश दिए कि भविष्य में अब वह महिला सरपंच किसी भी पंचायत की बैठक में कार्यवाही में भाग नहीं ले सकेगी। इसके अतिरिक्त पंचायत की जो भी चल अचल संपत्ति उसके पास है, वह तुरंत बहुमत रखने वाले पांच को सौंप दी जाए।
सस्पेंड सरपंच सोनिया के प्रतिनिधि संदीप (रामभगत) ने बताया कि उन्हें राजनीति का शिकार बनाया गया है। पहले जब अधिकारियों द्वारा मौके पर आकर जांच की गई तो उनका कोई कब्जा नहीं पाया गया था। जिस व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत दी, वह चुनाव में भी उनके खिलाफ ही था। उन पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं।












