हरियाणा के भिवानी जिले का अलखपुरा गांव आज ‘मिनी ब्राजील’ के नाम से पूरे देश में पहचाना जाता है। यहां करीब हर घर से एक लड़की फुटबॉलर निकल रही है और 200 से ज्यादा लड़कियां राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं
गांव की अनोखी खेल संस्कृति ने इस छोटे से क्षेत्र को महिला फुटबॉल का मजबूत गढ़ बना दिया है। गांव में लड़कियों के खेल के लिए बेहत्तर एवं शानदार सुविधाएं उपलब्ध हैं।
नियमित प्रैक्टिस के लिए मैदान रेडी है और बाहरी कोच भी उन्हें कोचिंग देते हैं। माता-पिता बेटियों को खेल में आगे बढ़ने के लिए पूरा स्पोर्ट कर रहे हैं, जिसके चलते रोजाना सैकड़ों लड़कियां मैदान में प्रैक्टिस करती दिखाई देती हैं।
इन खिलाड़ियों का सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत भारतीय महिला फुटबॉल टीम की कप्तान संजू यादव हैं, जो इसी गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय लेवल तक पहुंचीं।
बता दें कि इस क्षेत्र में शुरुआत में सुविधाओं की कमी अवश्य थी, मगर समय के साथ हरियाणा खेल विभाग ने यहां महिला कोच सोनिका बिजारणिया को नियुक्त किया।
कोच सोनिका ने बताया है कि उनके आने से खिलाड़ियों की तकनीक में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि 2014 से अब तक अंडर-14, 17, 19 और सीनियर स्तर के हर आयु वर्ग में भिवानी जिला पहला स्थान हासिल कर रहा है।
अलखपुरा की इन बेटियों की उपलब्धियां यहीं तक सीमित नहीं हैं। 2014, 2015 और 2016 में सुभ्रोतो कप जीतने वाली कई खिलाड़ी आज 50 से ज्यादा सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं।
भारतीय महिला फुटबॉल टीम की कप्तान संजू यादव के पदचिह्नों पर चलते हुए यह गांव नई फुटबॉल प्रतिभाओं का केंद्र बना हुआ है और देशभर में महिला खेलों के लिए प्रेरणा बन रहा है।