ट्रेन हादसे में एक हाथ-दोनों पैर कटे, इन हालातों में UPSC एग्जाम क्रैक कर फिर चमका सूरज

ट्रेन हादसे में एक हाथ, दो पैर और बाएं हाथ की तीन उंगलियां खो चुके सूरज तिवारी ने हालातों से लड़कर न केवल अपना भाग्य लिखा, बल्कि देशभर में अपनी चमक से युवाओं के लिए प्रेरणा बने।

पाठकों को बता दें कि, सूरज तिवारी मैनपुरी जिले के कुरावली तहसील के मोहल्ला घरनाजपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने आरंभिक शिक्षा शहर के महर्षि परशुराम स्कूल से हुई है।

इसके बाद वर्ष 2011 में उन्होंने एसबीआरएल इंटर कॉलेज मैनपुर से 10वीं और 2014 में संपूर्णानंद इंटर कॉलेज अरम सराय बेवर से 12वीं बोर्ड परीक्षा पास की थी। सूरज के पिता दर्जी का काम करते थे। कुरावरी में उनकी एक छोटी-सी दुकान थी जिससे घर का खर्चा चलता था।

24 जनवरी 2017, यही वो तारीख थी जिसने सूरज को जिंदगी भर का दर्द दे दिया। गाजियाबाद के दादरी में हुए एक ट्रेन हादसे में उनके दोनों पैर, एक हाथ और एक हाथ की तीन उंगलियां कट गई थी। वे कई महीनों तक हॉस्पिटल में रहे। घर आने के बाद तीन महीने तक बिस्तर पर रहे।

कुछ महीने बाद भाई की भी मौत हो गई है। लेकिन सूरज ने न सिर्फ अपने आपको, बल्कि परिवार को भी संभाला। वर्ष 2018 में उन्होंने दिल्ली आकर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में बीए में एडमिशन लिया। 2021 में बीए के बाद एमए में एडमिशन लिया।

यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित और मुश्किल परीक्षाओं में से एक है। उन हालातों में सूरज ने ठान लिया है, वे सिविल सर्विज एग्जाम देंगे। उन्होंने पता था कि यह उनके लिए उतना आसान नहीं होगा।

इसलिए उन्होंने दिन-रात एक करके यूपीएससी एग्जाम की तैयारी की। वे रोजाना 15 से 17 घंटे पढ़ाई करते थे। उन्होंने व्हील चेयरपर बैठकर बिना कोचिंग और एक्स्ट्रा क्लासेस के यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा दी।

यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम 2022 में सूरज तिवारी ने सफलता हासिल की। इस उपलब्धि ने परिवार में नई जान फूंक दी। रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने मिठाई बांटकर सूरज की कामयाबी का जश्न मनाया।

वर्ष 2022 की यूपीएससी सिविल परीक्षा में उन्होंने 917वीं रैंक हासिल की थी। रैंक के आधार पर उनका चयन इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विस (IIS) में हुआ। वे आईआईएस ऑफिसर हैं। सूरज की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए मिसाल हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी सपने पूरे करने की कोशिश कर रहे हैं।