कोई अपनी गाड़ी बेच रहा है, तो जान लें ये नियम! नहीं तो घर पर पहुंचेगी पुलिस

आजकल गाड़ी बेच देना आसान है। मगर बेचने के बाद उसकी कानूनी जिम्मेदारी से पीछा छुड़ाना मुश्किल हो जाता है। यदि ज़रा सी भी चूक हुई तो अगली बार किसी चालान, हादसे या केस में आपका नाम भी गाड़ी के साथ दौड़ता नजर आएगा।

मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत किसी भी गाड़ी को बेचते समय सबसे अनिवार्य है नया रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) ये दस्तावेज साबित करता है कि गाड़ी सरकारी रिकॉर्ड में किसके नाम पर दर्ज है। आपने गाड़ी सेल कर दी तो RC नए मालिक के नाम पर ट्रांसफर होना जरुरी है।

किसी भी मौखिक और लिखित करारनामे से काम नहीं चलेगा। यदि ऐसा नहीं होता और नए मालिक की गाड़ी से कोई दुर्घटना होती है, तो केस में पुराने मालिक का भी नाम जुड़ सकता है। क्योंकि RC अभी तक उसके ही नाम है। कुछ समय पहले एक केस सामने आया था, जहां एक लड़की की मौत हो गई थी।

जिस स्कूटी को वह लड़की चला रही थी,  उसकी RC पुराने मालिक के नाम थी। इसलिए पुराने मालिक पर भी केस बना था। नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करके आप पूरा केस पढ़ सकते हैं। मालिकाना हक ट्रांसफर करने के लिए कुछ कागजात की जरूरत होती है।

आवेदन 28: ये एक नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) है। यानी की ओनरशिप ट्रांसफर पर कोई आपत्ति नहीं है और आपकी गाड़ी का क्लीन रिकॉर्ड है। इस फॉर्म की आपको तीन कॉपी चाहिए होगी।

आवेदन 29: ये फॉर्म RTO को जानकारी देता है कि आपने अपना व्हीकल बेच दिया है। इस दौरान आपको Form 29 की दो कॉपी देनी होगी। ताकि ये कंफर्म हो सके कि कार से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स बायर को ट्रांसफर कर दिए गए हैं।

आवेदन 30: ये भी एक कंफर्मेशन फॉर्म है। फॉर्म 29 देने के बाद, ये कार बेचने वाले की जिम्मेदारी होती है कि वे फॉर्म 30 भरकर RTO में जमा करे ताकि ओनरशिप ट्रांसफर तुरंत शुरू हो सके। इन तीनों आवेदन को आप परिवहन वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं।

PUC सर्टिफिकेट

पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल या PUC सर्टिफिकेट ये वेरीफाई करता है कि आपकी कार का एमिशन सरकारी मानकों से मेल खाता है। आपकी गाड़ी की वायु प्रदूषण में ज्यादा भागीदारी नहीं है। आप अपने नजदीकी पेट्रोल पंप पर जाकर PUC सर्टिफिकेट ले सकते हैं। इलेक्ट्रिक गाड़ियों को PUC टेस्ट से बाहर रखा गया है।

कार इंश्योरेंस

कार की ओनरशिप ट्रांसफर करने में एक्टिव इंश्योरेंस पॉलिसी का भी बड़ा रोल है। बिना कार इंश्योरेंस के RTO गाड़ी की ओनरशिप आगे ट्रांसफर नहीं करेगा। इसलिए यदि कार इंश्योरेंस एक्सपायर हो गया है, तो उसे एक्टिव करा लीजिए।