पापा की आखरी ख्वाहिस पूरी करने के लिए बनी ये लड़की IFS टॉपर, तीन असफलताओं के बाद बनी अफसर

पापा की ख्वाहिस थी कि बेटी अफसर बने। 3 बार असफलता के बाद बेटी जब ने मुकाम छुआ तब तक परस्थिति बदल चुकी थी। बेटी अफसर तो बनी लेकिन आंखों में खुशी देखने के लिए पापा नहीं रहे थे।

यह स्टोरी है मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की अंजलि सोनधिया (Anjali Sondhiya) की, जिन्होंने अपने अपने दर्द को संघर्ष का माध्यम बनाया। कड़ी मेहनत और लगन से UPSC की इंडियन फाॅरेस्ट सर्विस (IFS) परीक्षा 2024 में टाॅपर बनीं।

9वीं रैंक लाकर देश-प्रदेश में परचम लहराया। अंजलि की सफल कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणादायी है जो चुनौतियों को झेलते हुए आगे बढ़ रहे हैं। एक इंटरव्यू में अंजलि सोनधिया बताती हैं कि वह मध्य प्रदेश के छोटे से गांव चंदरपुरा की रहने वाली हैं।

उनके पिता सुरेश सोनधिया किसान थे और चाहते थे कि बेटी अफसर बने। शुरुआती पढ़ाई पूर्ण करने के बाद अंजलि ने अफसर बनने की ठानी। यूपीएससी का सपना भरकर आगे बढ़ने का निर्णय लिया।

12वीं की पढ़ाई के बाद अंजलि इंदौर आ गईं और अपना ग्रेजुएशन पूरी की। उन्होंने बगैर कोचिंग के ही IFS परीक्षा की तैयारी स्टार्ट की। इंटरनेट के माध्यम से और ऑनलाइन स्टडी मटीरियल से नोट्स बनाकर पढ़ाई की। उनका मानना है कि यूपीएससी की तैयारी के लिए बेसिक कांसेप्ट क्लियर करना जरूरी है।

अंजलि ने पहली बार 2020 में परीक्षा दी, किंतु उनका नहीं हुआ। पर उन्हें हार न मानते हुए दोबारा एग्जाम दिया, मगर रिजल्ट उनके अनुसार नहीं था। 2023 में फिर से अंजलि ने परीक्षा दी और सफलता नहीं पा पाईं। तीनों वर्ष उनका प्रीलिम्स नहीं निकल पाया। उनका ऑप्शनल सब्जेक्ट जियोलाॅजी और फाॅरेस्टरी था।

इसके बाद उन्हें लगने लगा था कि अब नहीं हो पाएगा, मगर फिर उन्होंने एक बार फिर कोशिस की। इस दौरान उनके जीवन में घटी एक घटना ने झकझोर कर दिया। उनके पिता का देहांत हो गया। अंजलि हमेशा उस घटना को याद करती हैं।

जब उनके सपनों के आगे आर्थिक तंगी आ गई। हालांकि पिता के जाने के बाद मां ने उन्हें अफसर बनने के लिए प्रेरित किया और साथ दिया। अंजलि अपने लक्ष्य के लिए आगे बढ़ीं और दिन-रात एक कर दिया।

IFS एग्जाम 2024 में अंजलि बैठीं और प्रीलिम्स क्लियर किया। इसके बाद मेंस और इंटरव्यू में बेहतर प्रदर्नश किया। जब एग्जाम का रिजल्ट आया तो लिस्ट में पहले पेज पर उनका नाम था। इस बार IFS परीक्षा में कुल 143 कैंडिडेट्स सफल हुए थे। अंजलि की सफलता उनके परिवार के लिए गर्व का पल था।