Acid attack victims : राह ग्रुप फाउंडेशन के नेशनल चेयरमैन नरेश सेलपाड़ ने बालिका अधिकार सप्ताह के अवसर पर जींद जिले के गांव निडाना में आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में कहा कि एसिड अटैक की शिकार बेटियों के लिए स्कूल, कॉलेजों में एडमिशन और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि अब पीड़िताओं को न केवल शिक्षा में, बल्कि नौकरियों और पदोन्नति में भी कोटा मिलता है, मगर जागरुकता के अभाव में बेटियां इसका लाभ नही उठा पा रही हैं।
इस मौके पर राह संस्था की कानूनी सलाहकार अधिवक्ता अभिलाषा बागड़ी, कार्यक्रम संयोजक कीर्ति, डा. पूनम लोहान और आरती बापोड़ा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में एसिड अटैक से बचाव और पीड़ितों के (Acid attack victims) अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना था। इस दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर्स, एएनएम, जीएनएम और पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान महिलाओं और युवतियों ने “बेटी पढ़ाओ-देश बढ़ाओ” के नारे लगाकर बाल विवाह और एसिड अटैक के खिलाफ शपथ ली।
Acid attack victims : कॉलेज एडमिशन में है एक प्रतिशत आरक्षण
इस दौरान राह ग्रुप फाउंडेशन के नेशनल चेयरमैन नरेश सेलपाड़ ने कहा कि कॉलेज में दाखिले में दूसरे प्रकार के अंपग श्रेणियों की तरह ही एसिड अटैक से पिड़ित बेटी (Acid attack victims) को एक प्रतिशत का आरक्षण देने का प्रावधान है। यदि कोई कॉलेज या शिक्षण संस्थान ऐसा करने से मना करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो सकती है।
Acid attack victims : सरकारी नौकरियां और प्रमोशन
इस दौरान कानूनी सलाहकार मनीषा बागड़ी एवं डा. पूनम लोहान ने कहा कि केंद्र सरकार की सरकारी नौकरियों में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के माध्यम से एसिड अटैक पिड़िता को सरकारी नौकरियों में आरक्षण, पदोन्नति और आयु में छूट प्राप्त करने का अधिकार है। प्रत्येक समूह (A, B, C, D) के पदों में चार प्रतिशत रिक्तियां बेंचमार्क विकलांगता वाले व्यक्तियों के लिए आरक्षित, जिसमें मुख्य रुप से तेजाब पीड़िताओं (Acid attack victims) को शामिल किया गया है।
Acid attack victims : मिलता है मुआवजा और कानूनी सहायता : नरेश सेलपाड़
इस दौरान चेयरमैन नरेश सेलपाड़ ने कहा कि एसिड अटैक की शिकार (Acid attack victims) बेटियों के लिए कानूनी और वित्तीय मदद का प्रावधान है। जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, पीड़ितों को न्यूनतम ₹3 लाख का मुआवजा मिलेगा। गंभीर मामलों में यह राशि बढ़कर ₹5–8 लाख तक हो सकती है। इसके अलावा, पीड़ित प्रतिकर निधि योजना के तहत मेडिकल और पुनर्वास खर्च का भुगतान किया जाता है। जिससे पीड़ित अपनी इलाज और पुनर्वास की लागत आसानी से उठा सकें।













