हरियाणा में जींद–सोनीपत ग्रीनफील्ड हाईवे (Jind sonipat greenfield highwy toll free) अनिश्चितकाल के लिए टोल फ्री हो गया है। दरअसल यहां किसानों ने रक्षक सिक्योरिटी कंपनी के खिलाफ मांगों को लेकर भिड़ताना के पास टोल फ्री करवाकर धरना शुरू कर दिया है। टोल फ्री होने से पंजाब की तरफ से आने वाले वाहन चालकों, दिल्ली की तरफ जाने वाले वाहन चालकों को फायदा हो रहा है और वह बिना टोल दिए ही जा रहे हैं। धरना दे रहे लोगों ने कहा कि जब तक उनको न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वह यहां धरना जारी रखेंगे और टोल को फ्री रखेंगे।
किसान नेता रवि आजाद ने बताया कि रोहतक जिले के गांव बड़ाली निवासी समरजीत सिवाच रक्षक सिक्योरिटी में काम करता था। वह जम्मू- कटरा रोड प्रोजेक्ट में जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। 25 अगस्त को सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। किसान नेताओं ने आरोप लगाए कि यह दुर्घटना नहीं, बल्कि साजिश के तहत की गई हत्या है।
जींद-सोनीपत ग्रीनफील्ड हाईवे पर लगाया धरना, टोल करवाया फ्री
समरजीत सिवाच को न तो किसी तरह की एंबुलेंस या फर्स्ट एड की सहायता भी समय पर मिली। दिल्ली कटरा एक्सप्रेस वे (Delhi Katra Express way toll) का समय पूरा होने वाला था, इसलिए वह जींद-सोनीपत ग्रीनफील्ड हाईवे (Jind sonipat greenfield highwy toll free) पर धरने पर बैठे हैं और टोल को फ्री करवाया है।

सरकार और NHAI दावा करते हैं कि हाईवे पर पांच मिनट से पहले एंबुलेंस सर्विस मिल जाती है लेकिन समरजीत को 12 घंटे तक भी किसी तरह की सहायता नहीं मिली। इसके कारण खून ज्यादा बहने से समरजीत की मौत हो गई। इसकी मौत के लिए जिम्मेदार NHAI और सरकार है। इसी रोष और न्याय की मांग को लेकर वह धरना दे रहे हैं। लोगों के टोल पर धरना शुरू करने की सूचना के बाद मौके पर पुलिस व प्रशासन पहुंचा।
पुलिस कर रही निगरानी
लुदाना चौकी प्रभारी विजेंद्र सिंह ने बताया कि मृतक समरजीत सिवाच के स्वजनों को मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर धरना शुरू किया गया है। टोल फ्री करवाया गया है। मौके पर स्थिति सामान्य है और पुलिस व प्रशासन द्वारा इस पर निगरानी रखी जा रही है।
किसान नेता रवि आजाद ने कहा कि उनके साथ कई किसान संगठन यहां पहुंचे हैं। जब तक न्याय नहीं मिलता और किसान संगठन भी यहां पहुंच जांएगे। रवि आजाद ने मांग की कि मतृतक समरजतीत के स्वजनों को 50 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग दिया जाए। इसके अलावा 60 साल की उम्र तक बच्चों को उनका पूरा वेतन दिया जाए। उनकी मौत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।









